Facebook Like

Featured Video

Monday, 15 April 2019

Legal Rights.. (क़ानूनी अधिकार)


क़ानूनी अधिकार


इस लेख मे हमने Reader के लिए कुछ चुनिंदे Legal Rights.. (क़ानूनी अधिकार) के बारे मे जानकारी दिए है, तथा यह आशा करते है की  reader के लिए Legal Rights.. (क़ानूनी अधिकार) पर साझा की गई जानकारी यह भी पसंद आएगा !



क़ानूनी अधिकार

Legal Rights

     
1.
  पुलिस अफसर FIR लिखने से मना नहीं कर सकते, ऐसा करने पे उन्हें 6 महीने से 1 साल तक की जेल हो सकती है |

      भारतीय दंड संहिता 166 A (IPC Section 166 A)


      2.  कोई भी शादिशुदा व्यक्ति किसी अविवाहित लड़की या विधवा महिला से उसकी सहमती  से शारीरिक संबध बनाता है तो यह अपराध की श्रेणी मे नहीं आता है |

      भारतीय दंड संहिता व्यभिचार, धारा 498


Wednesday, 27 February 2019

Pulwama attack and reply पुलवामा हमला और जवाब..|

पुलवामा हमला और जवाब

 Pulwama attack and reply


1.        सोफ्ट्नेस से हार्डनेस की तरफ अग्रसर होता भारत |
2.        बदले का प्लान ऑपरेशन 360 डिग्री |
3.        Air Strikes बदला हिन्दुस्तान का |
4.        कैसे दिया ऑपरेशन को अंजाम ?
5.        Air Strikes की असल वजह |
6.        आसियान देशो को दी स्ट्राइक की जानकारी |
7.        मुख्य टारगेट बालाकोट |
8.        Air Strikes के लिए DASSAULT MIRAGE – 2000 ही क्यों ?
9.        INDIAN AIR FORCE मे DASSAULT MIRAGE – 2000 की भूमिका |
10.     Air Strikes मे तैनात Aircraft |

1.        सोफ्ट्नेस से हार्डनेस की तरफ अग्रसर होता भारत |

भारत और पाकिस्तान के हुए बटवारे के बाद दोनों देशो के बीच दो युध्दों     और  एक सिमित युध्द कारगिल हुए | दरअसल इसकी शुरुआत सिंधु जल संधि अमल मे आने के पांच साल बाद ही पकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर पर 1965 मे हमला कर शुरू कर दिया  तथा तब से पकिस्तान आतंकवाद और सेना दोनों का इस्तेमाल भारत के विरूध्द कर रहा है |  लेकिन पकिस्तान का आतंकवाद को  लेकर जिस तरह का रवैया रहा है तथा वर्तमान मे अब भी है उसकी वजह से मजबूर होकर भारत सोफ्ट्नेस से हार्डनेस की तरफ अग्रसर हो रहा है | जिसे हम URI मे हुए सर्जिकल स्ट्राइक और हाल ही मे हुए पुलवामा आतंकी हमले के विरुध्द मे Air Strikes जिसे सर्जिकल स्ट्राइक-2 नाम भी दिया जा रहा है से देख सकते है |

Sunday, 24 February 2019

Indus Water Treaty.. सिंधु जल संधि के पीछे की कहानी..|

इस लेख मे हमने Reader के लिए  Indus Water Treaty.  सिंधु जल संधि..| पर अहम जानकारी साझा कर रहे है, तथा यह आशा करते है की  reader के लिए Indus Water Treaty सिंधु जल संधि  पर साझा की गई जानकारी जरुर पसंद आएगी !

सिंधु जल संधि के पीछे की कहानी


Indus Water Treaty

1 सिंधु जल संधि क्या है ?

2 इतिहास और पृष्ठभूमि

3 विश्व बैंक की भागीदारी

4 समझौते मे क्या है ?

5 विवाद के विषय

6 क्या सिंधु जल संधि तोड़ी जा सकती है ?

7 इसका भारत पर क्या प्रभाव पड़ेगा ?

1. सिंधु जल संधि क्या है ?
सिंधु जल संधि को दो देशो के बीच जल विवाद पर एक सफल अंतराष्ट्रीय उदाहरण बताया जाता है |

सिंधु जल संधि यह पानी के वितरण के लिए 56 साल पहले विश्व बैंक की मध्यस्थता मे भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू और पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान द्वारा इस संधि पर हस्ताक्षर किये गए थे | इस संधि के प्रावधानों के अनुसार भारत सिंधु नदी के पानी का केवल 20 प्रतिशत तक का ही उपयोग कर सकता है |

Wednesday, 20 February 2019

WOMEN'S EMPOWERMENT. महिला सशक्तिकरण..|

महिला सशक्तिकरण

Women's Empowerment


क्या है महिला सशक्तिकरण?

महिला सशक्तिकरण राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक, भौतिक, अध्यात्मिक, शारीरिक तथा मानसिक सभी स्तर पर महिलाओं मे आत्मविश्वास पैदा कर उन्हें सशक्त बनाने की प्रकिया है | जिसे व्यापक रूप से संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा परिभाषित किया गया है | संयुक्त राष्ट्र संघ के अनुसार महिला सशक्तिकरण से तात्पर्य महिलओं मे आत्ममूलय की भावना विकल्प निर्धारित करने का आधिकार घर के भीतर एव बाहर दोनों स्थानों पर अपने जीवन को नियंत्रित करने के अधिकार के साथ ही राष्ट्रीय एवं अंतराष्ट्रीय स्तर पर अधिक न्यायोजित सामाजिक आर्थिक व्यवस्था के सृजन हेतु योग्यता के होने से है |

किन्तु अभी भी उक्त अधिकारों का पूर्णतया उपयोग महिलाएं नहीं कर पा रही है, एसे मे यह प्रश्न उठ खड़ा होता है की महिलओं की सशक्त करने की आवश्यकता ही क्यों उत्पन्न हुई ?
इसका उत्तर हमें विभिन्न कालकर्मों के अवलोकन से प्राप्त हो सकेगा | जैसे :

Sunday, 17 February 2019

Har Na Maan Ye Zindagi... (हार ना मान ए जिंदगी..|)

हार ना मान ए जिंदगी

किसी ने क्या खूब कहा है.. "जिंदगी मे गिरने से कभी मत डरो, क्योंकि उड़ते वही है जो गिरने की हिम्मत रखते है" |

जीवन मे हम सभी सफलता के सपने बहुत देखते है और उनके लिए कड़ी मेहनत भी करते है | लेकिन कई बार हमें बार-बार मिल रही नाकामयाबी से हम हार मान लेते है | या ये कहे की अपनी कमियों को पता कर एक बार और मेहनत कर उन्हें पूरा करने के बजाय, यह कहना ज्यादा बेहतर समझते है की शायद मेरी किस्मत ही ख़राब है, मेरे किस्मत मे ही नहीं है, भगवान् नहीं चाहता है की मे यह सब करु, वो मेरे साथ है ही नहीं, वो मुझसे नाराज है | इसलिए मे चाहे जितनी भी कोशिश क्यों ना करू मेरे से अब ये नहीं हो सकता किसी के भी मुख से एसी बात सुन यह कितनी हस्यात्मक सी लगती है | इतनी चालाकी से भगवान का नाम लेकर अपनी कमियों पर पर्दा डालने की कला कोई इनसे सीखे |

आज की कहानी हार ना मान ए जिंदगी को पढने के बाद आप सबको यकीन हो जाएगा की भगवान् हम सब के साथ हमेशा से ही थे, और है, तथा रहेगे | इसलिए हमें उन पे विश्वास करने की जरुरत है, ना की उन पर इल्जाम लगा के अपनी कमियों को छुपाने की |

एक दफे की बात है एक लड़का जो काफी गरीब परिवार से तालुक रखता था, वह गाँव से शहर आकर सरकारी नौकरी के लिए तैयारी कर रहा था, तथा उसने कुछ परिक्षाए दे चुका था तो वही अभी कुछ ओर देने बाकी थे | तभी एक दिन उसके जिंदगी मे एक पल ख़ुशी के भी आए और वह पल था की उसे एक Interview के लिए Call आया | Interview की खबर पाते ही वह खुश तो हो गया लेकिन यह ख़ुशी उसकी एक पल मे मानो ख़त्म सी हो गई, क्योंकि उसे अगली सुबह Interview के लिए दुसरे शहर मे जाना था, और उसकी समस्या ये थी की उसके पास Interview पर जाने के लिए पैसे नहीं थे, उसने अपने घर मे सब जगह ढूंढा तो इसे मुश्किल से जाकर 50 रूपये ही मिले

गरीब परिवार का लड़का, पढाई का खर्चा, शहर का खर्चा, और अब जब मौका मिला इन सब से निपटने का तो अब इसे समझ ना आ रहा था की अब क्यां करे ? पैसो का इंतजाम कैसे करे ? दोस्तों से पहले से ही बहुत उधार ले चुका था जिन्हें अभी तक लौटाया नहीं था, उन से ओर मांगेगे तो शर्म आएगी | और बस इस के बारे मे सोचते हुए  उसने पूरा दिन निकाल दिया और फिर अगली सुबह हिम्मत कर के उसने एक जोड़ी कपड़े अच्छे वाले साफ़-सुथरे निकाले और पहन कर के अपना सारा Document लेकर के Bus Stand की तरफ चल दिया | ये सोच कर के की कुछ ना कुछ तो कर लूगा या नहीं तो कोई ना कोई जुगाड़ तो हो ही जाएगा | इसी के साथ वह ऊपर वाले को धन्यवाद दे रहा था और उनसे बाते करते हुए पूछ भी रहा था की ये क्या कर दिया मेरे साथ ? और फिर इतना कह कुछ समय शांत हो गया और सोचने लगा शायद कोई ना कोई तो जान पहचान का तो मिल ही जाएगा, जिनसे लिफ्ट मिल जायेगी और मे पहुच जाऊंगा और अपना Interview अच्छे से देकर आ जाऊंगा | लेकिन यह सिर्फ उसकी सोच बन कर ही रह गई जब वह Bus Stand पर पंहुचा और काफी देर इंतजार करने के बाद भी उसे वहा कोई जान पहचान का नहीं मिला | और Bus से जाने के लिए तो इसे किराया चाहिए जो की इसके पास नहीं थे

अब यह निराश, परेशान, हताश और उदास होकर Bus Stand से बाहर आया, जिसे देख मानो इसका सारा सपना टूट सा गया हो, बाहर आते ही इसको सामने पास मे एक बड़ा सा मंदिर दिखा, फिर क्या था इसने सोचा डूबते को तिनके का सहाराक्यों ना इन्हीं से कुछ क्यों ना मांग ले | क्या पता इन्हें मेरी हालत पर तरस आ जाए और पूछ बैठे की बोलो तुम्हे मुझसे क्या चाहिए ? फिर क्या था, वह मंदिर की सीढ़िया चढ़ता है, अंदर जाता है, और प्रणाम करता है और साथ मे प्रणाम करते हुए ही बोल पड़ता है बस अब आप ही है जो बचा सकते हो मुझे इस समस्या से | इतना कह कर वह वापस जाते समय उत्तर कर सीढियों पर बैठ कर अपने जूते पहन रहा होता है तभी उसकी नजर पास मे बैठे एक फ़क़ीर पर पड़ती है जिनके कटोरे मे बहुत सारे पैसे पड़े होते है, जिसे देख लड़का फिर से मंदिर की तरफ मुड़ता है और भगवान् से कहता है वाह कमाल देखो जिसको चाहिए उसको दे नहीं रहे हो, और जिसको नहीं चाहिए उसको बहुत सारे दे रखे है पैसे | इस लड़के की सारी बाते वह फ़क़ीर भी सुन रहा था और वह समझ गया था की शायद यह लड़का किसी परेशानी मे है इसलिए भगवान् से इस तरह की बाते कर रहा है इसलिए फ़क़ीर ज्यादा देर ना करते हुए उस लड़के से पूछ बैठता है की क्या हुआ बेटा कोई परेशानी है, क्या मे तुम्हारी कोई मदद कर सकता हु ?

तो लड़का कहता है.. की बाबा आप क्या मदद करोगे हमारी आप तो खुद ही मांग कर के कमा रहे हो | लड़के की बात सुन कर
फ़क़ीर बाबा कहते है.. नहीं बेटा नहीं मे मांग करके नहीं कमा रहा हू | क्योंकि बेटा इस मंदिर मे जो भी आता है वह हमें इसलिए नहीं देकर जा रहा है की में मांग रहा हु, वो इसलिए देकर जा रहा है की उसे पूण्य कमाना है | मे तुम्हारी हो सके तो मदद कर सकता हु बेटा बात क्या है, किस बात से परेशान हो ? फ़क़ीर बाबा की इन सब बातो को सुन लड़का बाबा को बताता है की मुझे Interview के लिए जाना है, कम से कम 500 रूपये चाहिए और मेरे पास इतने पैसे नहीं है | लड़के की बात सुन फ़क़ीर बाबा कहते है बस इतनी सी बात, तुम मुझसे पैसे ले जाओ क्योंकि मुझे पैसों की ज्यादा जरुरत नहीं है और ना मोह है मे तो बस एक समय का खाना खाता हु, हा कुछ दिनों से बीमार हु इसलिए कुछ दवाईया चाहिए होती है, इसके अलावा बाकी पैसा मे खुद शाम को मंदिर के दान पेटी मे जाकर डाल देता हु | बाबा की बात सुन लड़का उनकी बातो का विश्वास कर लेता है और पैसे ले लेता है और पैसे लेने के बाद बोलता है बाबा मेरे पास जैसे ही पैसे आ जायेगे मे लौटने के लिए जरुर आऊंगा | बाबा बोलते है कोई बात नहीं बेटा मे यही बैठा हु इसके अलावा मेरा कोई दूसरा ठिकाना नहीं है |

पैसे मिलने पर लड़का खुश हो जाता है और जाकर Interview देता है | भाग्य से उसका Selection भी हो जाता है | खुश होकर जब वह शाम को वापस घर आ रहा होता है तभी उसे फ़क़ीर बाबा की याद आती है और कहता है आज मेरी जिंदगी का सबसे ख़ुशी का दिन है, और यह चमत्कार बाबा की मदद से ही हो पाया है जो आज के दिन मेरे लिए भगवान् बनकर आए, इसलिए पहले उन्हें यह खुशखबरी देकर उनका धन्यवाद करूँगा | इतना कह कर वह जब उस मंदिर के पास पहुँचता है तो देखता है की वहा का नजारा बदल चूका था |

वंहा बहुत सारी भीड़ जमा थी और उस भीड़ के करीब आकर लड़का पूछता है की क्या हो गया इतनी भीड़ किस लिए जुटी है यहाँ पर, तभी भीड़ मे से एक बन्दा कहता है, एक फ़क़ीर की मौत हो गई है | इतना सुनते ही वह भीड़ को छांटते हुए आगे पहुंचता है और सामने का नजारा देखते ही मानो उसके पैरो तले जमीन सरक गई हो | वह एकदम स्तभ हो जाता है | क्योंकि ये वही फ़क़ीर बाबा थे जिन्होंने इस लड़के की सुबह मदद की थी | अब लड़के को समझ नहीं आ रहा था की वे नौकरी मिलने की ख़ुशी मनाए या फ़क़ीर बाबा के मरने का गम | तभी इन्ही भीड़ मे से एक व्यक्ति कहता है की इन्होने आज दवाई नहीं ली थी शायद इनके पास पैसे नहीं रहे होंगे, जिसकी वजह से ये चल बसे | तभी पीछे से एक कड़वी आवाज मानो पुरे भीड़ को चीरते हुए आती है.. की अच्छा हुआ मर गया भिखारी ही तो था वैसे भी ये किसी काम के नहीं होते |

ये सब सुनने के बाद लड़का अंत मे ऊपर वाले को याद करता है और कहता है वाह रे ऊपर वाले एक इंसान किसी की जिंदगी बनाने के लिए खुद की जिंदगी दाव पर लगा कर चला गया |

ये छोटी सी कहानी हमें तीन बाते सिखाती है...

1. भरोसा रखो जब आप को लगता है की जिंदगी मे कुछ नहीं हो सकता | तब कही ना कही से आप को मदद जरुर मिलेगी | क्योंकि ऊपर वाला शायद किसी को नहीं मालुम, शायद आप को भी की ये कब आप को या किस ओर को किसी के लिए ऊपर वाला बना कर भेज दे | इस लिए हमेशा दुसरो पर विश्वास रखो, उनकी मदद करो क्योंकि हम जब मदद करेगे तभी एक दुसरे की मदद करते हुए आगे बढ़ पायेगे |

2. चमत्कार केवल उन लोगों के लिए होता है जो कभी हार नहीं मानते है |

3. आज का दिन जिओ, क्या पता कल हो ना हो |





आशा करता हूं दोस्तों आप सब को हमारा यह पाठ जरूर पसंद आया होगा और ऐसे ही रोचक और ज्ञान की बातों के बारे में जानने के लिए आप सब बने रहिए अपने ही Gyanireader..“संपूर्ण ज्ञान का एक उत्तम संगम” के साथ !

 Please, अगर आप को हमारा यह "हार ना मान ए जिंदगी..|" यह Short Moral Story अच्छा लगा है तो हमें Facebook, TwitterGoogle+PinterestWhatsup, etc पर Follow, Like & Share जरुर करे!


Note :

 अगर आपके पास इस लेख से related नये या फिर कोई और भी जानकारी है तो आप सब हमें कमेन्ट के माध्यम से जरुर भेजे अच्छे लगने पर हम उसे इस लेख मे अवश्य शामिल करेगे !
                                                                                         


                                                                                             धन्यवाद’..!

Friday, 8 February 2019

Top 10 Amazing Website

TOP 10 AMAZING WEBSITE

TOP 10 AMAZING WEBSITE

 
Internet  की सबसे ख़ास बात यह है की यह बहुत सारी Amazing Website से भरी पड़ी है बस शर्त यह है की ये Amazing Website बहुत खोजने पर ही नजर मे आती है | और आज हम एसे ही कुछ Amazing, Intresting तथा useful Website लेकर आए है और हम ये दावा भी करते है की इन Website को Explore करने मे आप सब को बहुत मजा भी आएगा ! इन Website पर आप अभी visit भी कर सकते है !

1. TURN  ANY  BLACK  AND  WHITE  PHOTO  INTO  COLOURED  PHOTO

ये Website बहुत ही कमाल की है इस website को use कर के आप एक अच्छे Photographer का काम कर सकते है ! जैसा आप ने ऊपर title तो पढ़ा ही होगा, आप ने सही पढ़ा इस website से आप किसी भी Black and White Photo चाहे वह किसी समय का क्यों ना हो उसे आप महज कुछ ही सेकंड मे coloured Photo मे convert कर सकते है क्यों है ना Amazing site. इस site को open करने के बाद इस मे आप Internet से किसी भी Image का Url Copy कर के या किसी भी photo को Upload करके Colorize it पर click कर के colour Image मे convert कर सकते है !और इतना ही नहीं इसे हम picture के निचे Download पर click करके Download भी कर सकते है | इस website पर अभी visit करने के लिए निचे दिए गए link पर click करे |
https://demos.algorithmia.com/colorize-photos/

Tuesday, 22 January 2019

सबरीमाला विवाद : परंपरा और आधुनिकता का द्वन्द

सबरीमाला विवाद : परंपरा और आधुनिकता का द्वन्द

इस लेख मे हमने Reader के लिए सबरीमाला विवाद : परंपरा और आधुनिकता का द्वन्द पर अहम जानकारी साझा कर रहे है, तथा यह आशा करते है की  reader के लिए सबरीमाला विवाद : परंपरा और आधुनिकता का द्वन्द पर साझा की गई जानकारी जरुर पसंद आएगी !


SABARIMALA TEMPLE

सबरीमाला मंदिर की पृष्ठभूमि


केरल के पठानमथिट्टा जिले की पश्चिमी घाट पर्वत श्रृखलाओ की गहन प्राकृतिक वादियो मे स्थित सबरीमाला मंदिर सदियों से तीर्थ यात्रियों के लिए एक पवित्र स्थल के रूप मे प्रसिद्ध रहा है ! यह भारत के कुछ प्रमुख मंदिरों मे से एक है जहा सभी धर्मो एव मान्यताओ के लोगों के प्रवेश की अनुमति है !

यहाँ मुलरूप से अयप्पा जिन्हें धर्मसस्थ भी कहा जाता है, की पूजा की जाती है ! हिंदु मान्यताओ के अनुसार अयप्पा, शिव तथा विष्णु के परित्यक्त पुत्र थे ! मान्यताए कहती है की समुंद्र मंथन के समय निकले अमृत को असुरों से प्राप्त करने तथा भस्मासुर नामक दैत्य के संहार के लिए विष्णु ने सुंदर स्त्री मोहिनी का अवतार लिया था ! शिव मोहिनी के इस रूप पर आसक्त हो गए, और इस प्रकार शिव तथा विष्णु के योग से जन्मा बालक अयप्पा कहलाया !

अयप्पा के जन्म का उद्देश्य महुषासुरी नामक राक्षसी को पराजित करना तथा जंगलो मे रहकर ब्रह्मचारी का जीवन जीने और अपने भक्तो की प्रार्थनाओ को सुनना था ! कुछ लोग इसे बौद्ध परंपरा से जोड़ते है तो कुछ स्थानीय आदिवासियों की पूजा पध्दति से !

अयप्पा के देश भर मे सैकड़ो मंदिर है जहाँ किसी भी उम्र की महिला के प्रवेश पर प्रतिबंध नहीं है ! किंतु सबरीमाला मे अयप्पा के विशेष स्वरूप "नैश्तिक ब्रह्मचारी" की पूजा की जाती है ! इसी कारण यहाँ कुछ विशेष उम्र (10-50) की महिलओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया जाता है ! येसा इसलिए क्युकी यहाँ माना जाता है की इससे अयप्पा के ब्रह्मचर्य मे खलल पड़ता है !

 सबरीमाला मंदिर मे कुछ विशेष उम्र की महिलओं के प्रवेश सबंधी प्रतिबंध की परंपरा यों तो वर्षो से चली आ रही थी परंतु यह परंपरा उतनी भी सख्त नहीं थी ! महिलओं के मंदिर प्रवेश पर सख्त प्रतिबंध तो 1991 के बाद से लगा ! लेकिन इस प्रतिबंध की पृष्ठभूमि 1950 मे ही बन गई थी जब रहस्यात्मक रूप से इस मंदिर मे आग लग गई थी, इस से बुरी तरह नुकसान पंहुचा था ! इसके फलस्वरूप इसका प्रभाव यह हुआ की इसके बाद मंदिर के रिवाजों मे कई महत्वपूर्ण परिवर्तन किये गए, और इन्ही परिवर्तनों मे से एक था महिलओं का मंदिर मे प्रवेश पर प्रतिबंध !

इस प्रतिबंध को ‘केरल हिन्दू सार्वजनिक पूजा स्थल (प्रवेश प्रमाणीकरण) नियम, 1965’ के अनुभाग 3बी के तहत प्रवर्तित किया गया ! लेकिन इस नियम के प्रवर्तन के बाद भी छिटपुट रूप से महिलाएं मंदिर मे दर्शन तथा अन्य गैर-धार्मिक कार्यो तथा कुछ पारंपरिक रस्मों के निर्वहन, जैसे नवजात के प्रथम भोजन की रस्म (चोर्रून) के लिए महिलाएं मंदिर आती रही ! 

उच्च न्यायालय का फैसला


1990 मे एस. महिन्द्र्ण नाम के व्यक्ति ने केरल हाई कोर्ट मे युवा स्त्रियों के मंदिर प्रवेश के खिलाफ एक याचिका दायर की ! इस याचिका पर फैसला सुनाते हुए 1991 मे केरल हाई कोर्ट ने प्राचीन समय से चली आ रही प्रथा को आधार बनाते हुए 10 से 50 वर्ष की स्त्री को मंदिर मे प्रवेश के लिए प्रतिबंधित कर दिया ! साथ ही उच्च न्यायालय ने केरल राज्य सरकार को निर्देशित किया की वे इस आदेश को सुचारू रूप से प्रवर्तित करने के लिए पुलिस बल का भी प्रयोग कर सकती है !

सबरीमाला मंदिर के विरुध्द जनहित याचिका


2006 मे भारतीय युवा अधिवक्ता संगठन की ६ महिला सदस्यों ने सबरीमाला मंदिर की इस परंपरा को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट मे एक जनहित याचिका दायर की और तर्क रखा की विशेष उम्र की महिलओं (10-50)  को मंदिर प्रवेश से प्रतिबंधित करने की यह परंपरा उनके समानता (अनुच्छेद 14) तथा उपासना की स्वतंत्रता (अनुच्छेद 25) के मौलिक अधिकार का उल्लंघन करती है ! इसके अलावा उन्होंने केरल हिंदु सार्वजनिक पूजा स्थल (प्रवेश प्रमाणीकरण)नियम, 1965, के उन प्रावधानों जिनके आधार पर महिला प्रवेश प्रतिबंध को समर्थन दिया जाता है, की वैधता पर भी प्रश्नचिन्ह लगाया !

2007 मे केरल की लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट की सरकार ने भी उक्त जनहित याचिका का समर्थन करते हुए शपथ पत्र दाखिल किया !

सर्वोच्च न्यायालय का फैसला


2008 मे सर्वोच्च न्यायालय ने इस मामले को 3 सदस्यीय बेंच को सौपा जिस पर 7 वर्षो के बाद 2016 मे सुनवाई हुई ! 2017 मे सर्वोच्च न्यायालय ने इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए इसे 5 सदस्यीय संवैधानिक पीठ को हस्तांतरित कर दिया ! इस पीठ ने 28 सितंबर 2018 को 4:1 के बहुमत से ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए निर्णय दिया की सबरीमाला मंदिर मे 10-50 वर्ष की महिलओं के प्रवेश पर प्रतिबंध की प्रथा उनके समानता तथा उपासना की स्वतंत्रता जैसे मौलिक अधिकारों [अनुच्छेद 14,15,19(1), 21 तथा 25(1)] का उल्लंघन करती है ! यह प्रथा असंवैधानिक है तथा केरल हिन्दू सार्वजनिक पूजा स्थल (प्रवेश प्रमाणीकरण) नियम, 1965 का अनुभाग 3 बी जो इसे समर्थित करता है इस को शून्य घोषित करते हुए कहा की यह न केवल संविधान का उल्लंघन करता है ! बल्कि यह अपने ही मूल नियम के आशय के विरुध्द है !

सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 5 सदस्यीय संवैधानिक पीठ मे जस्टिस इंदु मल्होत्रा ने इससे असहमत राय रखते हुए कहा, एक धर्मनिरपेक्ष राज्य मे न्यायालय को धर्म के आंतरिक मामलों मे हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए तथा न्यायालय को एक विशेष धार्मिक संप्रदाय के आंतरिक मामलों के प्रबंधन के अधिकार का सम्मान करना चाहिए ! साथ ही अनुच्छेद 14 जो स्त्रियों को समानता के अधिकार की गारंटी देता है, वह अनुच्छेद 25 के अंतर्गत प्राप्त अन्य के अंत:करण की स्वतंत्रता, धर्म को अबाध रूप से मानने आचरण करने और प्रचार करने की स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन नहीं कर सकता !

महिला मंदिर प्रवेश संबधी विधिक पक्ष


धर्म का अर्थ केवल उपासना या विधि विधान नहीं है ! धर्म एक जीवन पध्दति है, जिंदगी को जीने और समझने का नजरिया है जो अनिवार्यत: व्यक्ति की गरिमा से जुड़ता है ! एसा कोई भी विधि-विधान या परंपरा जो व्यक्ति की गरिमा को सीमित करती हो, उसे निश्चित ही धार्मिक नहीं कहा जा सकता !

सबरीमाला मंदिर मे 10-50 वर्ष की महिलओं का प्रवेश प्रतिबंध न केवल उनके समानता एव उपासना के मौलिक अधिकार का हनन करता है बल्कि एक मानव के रूप मे उन्हें दोयम दर्जे पर रखकर उनकी गरिमा पर भी घात करता है ! यह संविधान द्वारा प्रदत्त गरिमापूर्ण जीवन के अधिकार का उल्लघंन करता है ! इसके अलावा मासिक धर्म के आधार पर उम्र-विशेष (10-50) वर्ग की महिलाओं का प्रवेश प्रतिबंध महिलाओं के मासिक धर्म की स्थिति एव उनकी उम्र को सार्वजनिक रूप से प्रकट करता है ! इसके अलावा यह उन्हें सामूहिक कार्यक्रम से अलग कर उनके साथ अस्पृश्यता जैसा व्यवहार भी करता है ! तथा यह उनके निजता एव गरिमा के अधिकार का सरासर उल्लंघन भी है ! यह संविधान के अनुच्छेद 17, 14, एंव 15 के अंतर्गत प्रदत्त समानता के अधिकार का भी उल्लंघन करता है ! इसके अलावा महिलाओं का सबरीमाला मंदिर मे प्रवेश प्रतिबंध उनके उपासना के मौलिक अधिकार अनुच्छेद 25(1) का निषेध करता है ! यहाँ तक कि संविधान का अनुच्छेद 25(2) स्पष्ट रूप से अनुमति देता है की राज्य सामजिक कल्याण और सुधार के लिए हिंदू धार्मिक संस्थाओ को हिंदुओ के सभी वर्गों और अनुभागों के लिए खोलने का उपबंध कर सकता है !

विपक्ष का विधिक तर्क


सर्वप्रथम तो यह की एक विविधता प्रधान तथा धर्म निरपेक्ष समाज मे न्यायालय को धर्म के आंतरिक मामले मे हस्तक्षेप से बचना चाहिए ! धर्म मूलतः विश्वास का मामला है, यह जानने से कही अधिक मानने का मामला है ! कोई भी धार्मिक स्थल मूलरूप से वहां की विशिष्ट मान्यताओ एव विधि-विधानों के आधार पर ही विशेषित होता है ! यदि कोई उक्त (कथित) विश्वास को मानता है तो उसे इससे संबधित मान्यताओ को भी मानना जरुरी होता है, अन्यथा विश्वास का फिर कोई महत्व नहीं होगा !

दुसरी बात यह की संविधान का जो अनुच्छेद 25, महिलाओं को उपासना की स्वतंत्रता प्रदान करता है, वही अनुच्छेद उन लाखों अयप्पा के मानने वालो को भी अंत:करण की स्वतंत्रता, धर्म को अबाध रूप से मानने तथा आचरण करने की स्वतंत्रता प्रदान करता है ! इसी प्रकार यदि बात करे अनुच्छेद 14 की तो यह निश्चित ही समानता के अधिकार की गारंटी देता है, लेकिन यह अनुच्छेद उपासना के मौलिक अधिकार (अनुच्छेद 25) का भी उल्लंघन नहीं कर सकता ! इसलिए इसके उपरांत मे शायद धर्म एवं धार्मिक मामलों मे अनुच्छेद 14 को अलग नजरिये से देखा जाना चाहिए ! यदि अनुच्छेद 15 के आधार पर असामानता की बात करे तो, दरअसल यह प्रतिबंध कुछ विशेष उम्र (10-50) की महिलाओं के लिए है न की संपूर्ण महिला वर्ग के लिए ! इसलिए इसे लैंगिक असमानता कहना उचित नहीं है ! इसके अलावा यदि अनुच्छेद 17 के आधार पर अस्पृश्यता की बात करे तो संविधान मे इसे अनुच्छेद को शामिल करने का मूल उदेश्य जाति आधारित अस्पृश्यता का उन्मूलन करना था ! इसमें लैंगिक अस्पृश्यता जैसी कोई बात शामिल नहीं थी ! यदि संविधान निर्माताओ का आशय लैंगिक असमानता से होता तो इसमें विशेष रूप से इस पद को शामिल किया जाता !

विधिक तर्कों का निचोड़ तथा सामाजिक पहलु


उपरोक्त तर्को के आधार पर देखे तो निश्चित ही थोड़ी देर के लिए यह निष्कर्ष निकालना जटिल हो जाता है कि आखिर सबरीमाला मंदिर मे महिलाओं का प्रवेश प्रतिबंध उचित है या अनुचित ! लेकिन यदि गहराई से देखे तो एक एक बात जो स्पष्ट होती है वह यह की जहाँ मंदिर प्रवेश प्रतिबंध को अवैध ठहराने के पक्ष मे तार्किकता अधिक है, वही प्रतिबंध को जायज ठहराने के तर्को मे मान्यता, परंपरा और रिवाजो को सहेजने की कोशिश अधिक है ! निश्चित ही किसी परंपरा या रिवाज के निर्माण मे उस समय की स्थितियां उत्तरदायी होती है और तत्कालीन समाज की शर्ते उसे निर्मित करती है ! लेकिन ज्यों-ज्यों समाज विकास करता है, स्थितियों के साथ-साथ विचारो एंव मान्यताओ मे भी परिपक्वता आती है ! सामाजिक विकास के लिए जरुरत इस बात की होनी चाहिए की आधुनिकता का स्वीकार परंपरा के बिल्कुल विरुध्द न होकर उसके सातत्य मे हो !

यदि भावनाओं एंव मान्यताओ से परे हटकर देखे तो सबरीमाला मंदिर मे महिलाओं के मासिक धर्म की वजह से प्रतिबंध को भला कैसे तार्किक कहा जा सकता है, यह बात ही असभ्य एंव अवैज्ञानिक है ! मासिक धर्म जो उतना ही नैसर्गिक है जितनी प्रकृति, उसे भला किस आधार पर अपवित्रता का मानक बनाया जा सकता है ! निश्चित ही यह नंदनीय और गरिमा विरुध्द है ! एसा स्थल जहाँ स्त्री की गरिमा का एसा उल्लंघन शामिल हो वहाँ प्रवेश को लेकर इतनी जदोजहद तथा सम्मान हासिल करने की यह जिद्द क्यों ? इस प्रवेश से महिलाओं की समाज मे कितनी प्रगति हो जाएगी ?

महिलाओं को भी समझना होगा की यह कोई उतना भी महत्वपूर्ण मुद्दा नहीं है, लेकिन इतना जरुर है की मासिक धर्म के नाम पर प्रतिबंध का विरोध अवश्य किया जाना चाहिए ! होना तो यह चाहिए, परिपक्व (तैयार होना) होती सामजिक संस्थाएँ आगे बढ़कर खुद एसी प्रथाओ का उन्मूलन के लिए कदम उठाएं बजाय कि इसके लिए महिलाओं को लड़ाई लड़नी पड़े ! यह बात ठीक है की इससे महिलाओं की सामाजिक स्थिति मे कोई आमूल परिवर्तन नहीं आ जाएगा और न ही उनके प्रवेश न करने से उन पर कोई पहाड़ टूट पड़ेगा, लेकिन इसका प्रतीकात्मक महत्व अवश्य है ! इससे महिलाओं की गरिमा विरुध्द परंपराओं मे सेंध जरुर लगेगी, तथा उनकी अपवित्रता जैसी अवैज्ञानिक मान्यताओ की चूले अवश्य हिलेगी ! कम से कम महिलाओं मे स्वयं अपनी शारीरिक स्थितियों को लेकर हीन भावना की ग्रथियाँ टूटेगी ! तथा महिलाओं के प्रति समाज की सड़ी हुई कुछ मानसिकताओं के उपचार मे महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेगा !

निष्कर्ष

पारंपरिकता को चाहिए की वह कुछ कदम आगे बढे, आधुनिकता के लिए जरुरी है कि वह थोड़ा झुककर पीछे मुड़कर हाथ बढाए और परंपरा का हाथ थाम ले तथा एक सुंदर और गतिशील सामजिक सातत्य बना ले तभी समाज की गति बिखरी और ऊबड़-खाबड़ नहीं होगी, वह बीच-बीच से टूटी और असंगत नहीं होगी बल्कि वह परंपरा की मजबूती और आधुनिकता के प्रकाश मे प्रगतिशील तथा निरंतरता लिए होगी !




 
                            संतोष कुमार पासी 
                         Civil Service Aspirant (UPSC)
                               संस्थापक सदस्य 
                      आभास महासंघ मिशन 24 कैरेट (NGO)
                            [एक कदम मानवता की ओर]
                            Cont.. 9137207484




आशा करता हूं दोस्तों आप सब को हमारा यह लेख जरूर पसंद आया होगा और ऐसे ही रोचक और ज्ञान की बातों के बारे में जानने के लिए आप सब बने रहिए अपने ही Gyanireader..“संपूर्ण ज्ञान का एक उत्तम संगम” के साथ !

 Please, अगर आपको हमारा सबरीमाला विवाद : परंपरा और आधुनिकता का द्वन्द पर लिखा लेख अच्छा लगा है तो आप हमें Facebook, TwitterGoogle+PinterestWhatsup, etc पर Follow, Like & Share जरुर करे!


Note :

 अगर आपके पास इस लेख से related नये या फिर कोई और भी जानकारी है तो आप सब हमें कमेन्ट के माध्यम से जरुर भेजे अच्छे लगने पर हम उसे इस लेख मे अवश्य शामिल करेगे !
                                                                                         

                                                                                             धन्यवाद’..!