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Friday, 27 July 2018

INDEPENDENCE DAY IN INDIA

भारतीय स्वतंत्रता दिवस

 “भारत एक राष्ट्र की संकल्पना” करना इतना आसान नहीं जितना की देश का एक आम आदमी समझता है ! भारत को सबसे पहले यदि किसी ने राष्ट्र के रूप मे स्थापित किया तो वह है महान सम्राट चन्द्रगुप्त मोर्य उसके बाद इस देश को राष्ट्र  के रूप मे पहचान दिलाने वाला एक महान योध्दा वीर सम्राट अशोक, उसके बाद यह राष्ट्रीयता की अपनी विशेष पहचान खो बैठा किन्तु जैसे-जैसे समय बीतता गया, लोग व् उनकी सोच बदली, राष्ट्रीय अन्तराष्ट्रीय स्तर पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष बदलाव हुए इन्ही बदलावों का परिणाम था की इस देश के लम्बे समय के बाद सम्राट अशोक के बाद मुगल क्रांतिवीर, मुग़ल सम्राट अकबर जन्मा जिसने इस भारत भूमि को “भारत एक राष्ट्र” के रूप मे पहचान पुन: वापस दिलायी, उसके बाद के उत्तराधिकारीयों द्वारा विरासत को सरक्षित एंव सवध्दित कर पाने मे असफल रहे ! अंततः सत्ता पर धीरे-धीरे व्यापार के सहारे कब्ज़ा ब्रिटिश उपनेवेशवादी व् साम्राथवादी सोच के लोगो ने कर लिया और हमारे वो क्षेत्रीय शासक जो  कभी एक राष्ट्र के रूप मे स्थापित थे टुकड़ो मे बट कर हमने अपनी पहचान को खो दिया और हमारे स्थानीय या क्षेत्रीय शासक अंग्रेजो से ‘पेन इंडिया’ हेतु संघर्ष मे नहीं उतरे बल्कि ये सभी अपने-अपने शासन व् निजी स्वार्थो मे डूबे रहे जिसका लाभ उठाकर अंग्रेजो ने धीरे-धीरे टूटे-फूटे एवं बिखरे भारत को फिर से एक करने का दुष्साहस किया ! इससे पूर्व भारत मे अंग्रेजो की शक्ति मजबूत होने का सबसे बड़ा कारण था उनकी “बाटो और राज करो” नीति इस नीति ने सम्पूर्ण भारतीय क्षेत्र पर अपने आपको स्थापित करने का काम किया !

अंग्रेजी शासन व् उनके भेदभाव पूर्ण शासन-प्रशासन, भू-राजस्व-कर एवं सामजिक – धार्मिक विचारों से देश के उन तमाम लोगो को आघात पहुचाया जो ‘लकीर के फ़क़ीर’ बने हुए थे तथा साथ ही भारत को एक सकारात्मक सोच एव व्यवस्थित ढांचा निर्मित कर परम्परागत विचारो मे बदलाव किया ! बदलाव का परिणाम देश मे अंग्रेजी शासन के विरुद्ध कोने-कोने से आवाजे ही नहीं बल्कि एक योजनाबध्द कार्यक्रम शुरू हुआ, अंग्रेजो ने ही इस कार्यक्रम को जन्म दिया और यह कार्यक्रम था २८ दिसंबर १८८५ मे श्री ए. ओ. ह्युम (एलान आक्टेवियन ह्युम ) द्वारा बम्बई मे कांग्रेस दल की स्थापना, दुसरे क्षेत्रीय स्तर पर युवा आक्रोश जिस से देश को अंग्रेजो के लम्बे शासन व् गुलामी के कलंक से मुक्ति के बीजारोपण हो चुके थे और वो सब वट वृक्ष बनकर अपने प्राणों की परवाह न कर भगत सिहं , राजगुरु, बतुकेशवर दत्त, उधमसिह, अशफाक उल्ला खां, गाँधी, नेहरु, पटेल, सुभाषचंद्र बोस, लाला लाजपत राय, तिलक, व् एसे ही लाखो-लाख लोगो ने प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से अंग्रेजो का सामना किया न जाने कितने अत्याचार सहे कितनी मौते हुए, कितनी माताए-बहने विधवा हुई अपने बेटे-पति व् परिवारों को खोया व् अपने आपको भी मिटा दिया, तब वो दिन आया जिसकी सैकड़ो सालो से स्वप्न की तरह अपने दिल और दिमाग मे तस्वीर बसाये थे, जिसकी कल्पना हमारे क्रांतिवीर योध्दा व् जनता ने १८५७ मे देखी थी, वह स्वप्न था भारतीयों व् भारत की अंग्रेजी शासन से मुक्ति और वो दिन भी आ ही गया लेकिन इस लम्बे संघर्ष और बलिदान का परिणाम बजाए शांति और शुकून के दर्द और दर्द दे गया – परिणाम का दिन १५ अगस्त १९४७ भारत की स्वतंत्रता और १४ अगस्त पाकिस्तान की स्वतंत्रता अर्थात भारत विभाजन का घाव हमेशा-हमेशा के लिए इसका परिणाम मिला जो माउन्टबेटेन के दिमाग की उपज एवं तमाम हिन्दू-मुस्लिम कट्टरपंथीयों का प्रयास था !

१५ अगस्त भारत की स्वतंत्रता का दिन था और व् दिन था शुक्रवार का भारत अपनी आजादी का जश्न रात १२:०० बजे दिल्ली मे मना रहा था, और सभी बड़े नेता उपस्थित थे किन्तु अहिंसा के पुजारी - साबरमती के संत (महात्मा गाँधी जी ) उस जश्न मे शामिल नहीं थे !

भारत व् भारत की जनता आजाद हुई अंग्रेजो के शासन व् उनकी गुलामी से, अब भारत अपना स्वतंत्रता दिवस मनाते हुए भारत के अन्दर अंग्रेजो द्वारा और कुछ भारतीय विचारों द्वारा एक लम्बे समय से दी गयी बीमारियों से उबरने व् कुछ क्षेत्रीय रियासतों को शेष भारत मे विलय करने की आशा बन रही थी, किन्तु भारत स्वतंत्रता के समय जिन बीमारियों से पीड़ित था जैसे --- जातीयता, साम्प्रदायिकता, आर्थिक ऊँच-नीच, क्षेत्रीय भेद भाव, गरीबी, भुखमरी, अशिक्षा, बेरोजगारी, धार्मिक अन्धविश्वास, आर्थिक संसाधनो का न्यायोचित वितरण न होने, कृषि की दैनीय दशा – किसानो द्वारा आत्महत्या, सिचाई व् पीने योग्य जल संशाधनो का अभाव, सामाजिक समरसता का अभाव, आदि बीमारियों से ग्रस्त भारत अभी उभरा भी नहीं था की आतंकवाद, उग्रवाद, नक्सलवाद, और राजनीतिक गुंडा-गर्दी, भष्टाचार इत्यादि समस्याओ ने भारत को और घेर लिया है, जिससे भारत व् उसकी भोली भली जनता को आजाद कराना होगा तब देश मे सच्ची स्वतंत्रता, समानता, समता, बन्धुत्व और न्याय का राज होगा तभी सही मायने मे आम आदमी को भारतीय स्वतंत्रता दिवस की प्रत्येक वर्ष मनाये जाने वाली वर्षगाठ के मायने समझ आएगा ?

अभी तक जो राज्य भारत सम्प्रभुता के अधीन नहीं ये उनको भी सरदार वल्लभ भाई पटेल ने शेष क्षेत्रीय शासको के अथक प्रयासों से पुन: भारत को एक शक्तिशाली प्रभुत्व सम्पन्न राष्ट्र के रूप मे स्थापित किया, जिसको आज डॉ. अम्बेडकर द्वारा निर्मित भारतीय सविधान मे अनुच्छेद 1 मे India, that is Bharat, shall be a union of state कहा जाता है, जो प्रति वर्ष १९४७ से लगातार १५ अगस्त को देश मे तिरंगे झंडे के नीचे समस्त भारत वर्ष अपनी आजादी की वर्षगाँठ मनाता है , राष्ट्रीय दिल्ली मे शासक शाहजहाँ द्वारा निर्मित लाल किले के प्राचीर से भारत के प्रधान मंत्री देशवासियों को सबोधित करते हुए अपनी राष्ट्रीय, सम्प्रभुता, एकता और अखंडता का अहसास कराते है !

                            --BY--
                             लालसिहं भूमेवालकर एडवोकेट
                                     (सामजिक कार्यकर्त्ता)
                            राष्ट्रीय अध्यक्ष – आभास महासंघ
                                                (मिशन 24 कैरट)




आशा करता हूं दोस्तों आप सब को हमारा यह पाठ जरूर पसंद आया होगा और ऐसे ही रोचक और ज्ञान की बातों के बारे में जानने के लिए आप सब बने रहिए अपने ही Gyanireader..“संपूर्ण ज्ञान का एक उत्तम संगमके साथ !


                                                                                         
                                                                                             ‘धन्यवाद’..!

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