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Friday, 6 July 2018

ईश्वर का भेजा फ़रिश्ता - एक Moral Story

ईश्वर का भेजा फ़रिश्ता - एक  Moral Story



इस लेख मे हमने Reader के लिए ईश्वर का भेजा फ़रिश्ता - एक  Moral Story के रूप मे दिए है, और ये हम आशा करते है की इस लेख को पढने के बाद  reader's एक पल के लिए सोचने पर मजबूर हो जायेगे और इस बात से सहमत भी होगे वाकई जिस शख्स की बात कही है वह ईश्वर का भेजा फ़रिश्ता ही है !


 ‘ मित्रोंआप तो अब समझ ही गए होंगे की हम किस की बात कर रहे है, जि हा दोस्तों आप ने सही समझा वो सकसियत कोई और नहीं है बल्कि वो हमारी माँ है !
तो चलिए मित्रो जानते है एक छोटी सी कहानी जिसमे माँ को लेके एक बच्चे और भगवान की बीच चर्चा हो रही है ! जिसमे भगवान माँ को अपना ही रूप बताते है ! 

ईश्वर का भेजा फ़रिश्ता


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Moral Story

एक समय की बात है एक बच्चे का जन्म होने वाला था ! जन्म से कुछ क्षण पहले बच्चे ने भगवान से पूछा कि
 मैं इतना छोटा हूं खुद से कुछ कर भी नहीं पाता भला धरती पर मैं कैसे रहूंगा कृपया मुझे अपने पास ही रहने दीजिए मैं कहीं नहीं जाना चाहता !”

तब  भगवान बोले... मेरे पास बहुत से फरिश्ते हैं उन्ही में से एक मैंने तुम्हारे लिए चुना है वह तुम्हारा बहुत ख्याल रखेगा !”

फिर बच्चा बोलता है... “ पर आप मुझे बताइए मैं यहां स्वर्ग में कुछ नहीं करता बस गाता और मुस्कुराता हूं मेरे लिए खुश रहने के लिए इतना ही काफी है !”

 तब फिर भगवान बोलते है... तुम्हारा फ़रिश्ता तुम्हारे लिए गायेगा और हर रोज़ तुम्हारे लिए मुस्कुराएगा भी और तुम उसका प्रेम महसूस करोगे और खुश भी रहोगे !”

बच्चे को अब भी शांति नहीं मिलती है और ओ फिर भगवान से बोलता है... और जब वहां लोग मुझसे बात करेंगे तो मैं समझूंगा  कैसेमुझे तो उनकी भाषा नहीं आती ?

तब भगवान बच्चे को जवाब देते है... तुम्हारा फरिश्ता तुमसे सबसे मधुर और प्यारे शब्दों में बात करेगाऐसे शब्द जो तुमने आज तक यहां भी नहीं सुने होंगे, और बड़े धैर्य और सावधानी के साथ तुम्हें बोलना भी सिखाएगा !”

इस के बाद बच्चे ने भगवान से फिर पूछा... “ और जब मुझे  आपसे बात करनी होगी तो मैं क्या करूंगा ?

भगवान् ने कहा... “ तुम्हारा फ़रिश्ता तुम्हें हाथ जोड़कर प्रार्थना करना सिखाएगा, और इस तरह तुम मुझसे बात कर सकोगे !”

अब बच्चे को ये समझ आ गया अब मुझे धरती पे जाना ही पड़ेगा उसकी कोई चालाकी अब काम नहीं आ रही थी बच्चे की उम्मीद अब मानो ख़तम सी हो गयी लेकिन बच्चे ने एक और बार कोशिश करनी चाही और उसने फिर से भगवन से कहा... मैंने सुना है कि धरती पर बुरे लोग भी होते हैं उनसे मुझे कौन बचाएगा ?”

 भगवन बच्चे की इन सभी नादान चालाकी से वाकिफ थे इसलिए वे मुस्कुराते हुवे जवाब देते है... तुम्हारा फ़रिश्ता तुम्हें बचाएगा,  भले ही उसकी अपनी जान पर खतरा क्यों ना आ जाये !

अब बच्चे ने एक और प्रयास करने की कोशिश की इस बार उसने भगवान को भावुक करने के लिए भावनात्मक आवाज मे कहता है... लेकिन मैं हमेशा दुखी रहूंगा क्योंकि मैं आपको नहीं देख पाऊंगा !

इस बार भगवान मे बच्चे से कहा... मे समझता हु की तुम मुझसे दूर नहीं जाना चाहते हो तुम्हे लगता है की तुम मुझसे दूर जाकर हमेशा के लिए दूर हो जाओगे लेकिन एसा कुछ नहीं होगा  “तुम इसकी चिंता मत करो; मेरा फ़रिश्ता हमेशा तुमसे मेरे बारे में बात करेगा और तुम वापस मेरे पास कैसे आ सकते हो ये भी बताएगा !
ये सुनते ही मानो बच्चे के मन के सभी सवाल ख़त्म से हो गये मानो उसको अपने सभी सवालों के जवाब मिल गए उसके मन मे असीम शांति की लहर सी उठ गयी हो ! बच्चे के मन के शांत होते ही मानो उस वक्त पुरे स्वर्ग में भी असीम शांति सी छा गई थी, पर पृथ्वी से किसी के  कराहने की आवाज़ आ रही थी..... बच्चा समझ गया कि अब उसे जाना है, भारती पे जाने से पहले बच्चा उस फ़रिश्ते का नाम जानना चाहता था इसलिए उसने एक बार और रोते-रोते भगवान से पूछा...हे ईश्वर, अब तो मैं जाने वाला हूं कृपया मुझे उस फरिश्ते का नाम बता दीजिए ?”

 भगवान बोले, “फरिश्ते के नाम का कोई महत्व नहीं है, बस इतना जानो कि तुम उसे माँकह कर पुकारोगे !

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आशा करता हूं दोस्तों आप सब को हमारा यह पाठ जरूर पसंद आया होगा और ऐसे ही रोचक और ज्ञान की बातों के बारे में जानने के लिए आप सब बने रहिए अपने ही Gyanireader..“संपूर्ण ज्ञान का एक उत्तम संगम” के साथ !


                                                                                                       धन्यवाद’..!


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