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Saturday, 18 August 2018

सफलता के सूत्र - Success Formula

सफलता के सूत्र - Success Formula

इस लेख मे हमने Reader के लिए कुछ चुनिन्दा सफलता के सूत्र - Success Formula लाये है !  पिछले लेख मे हमने reader के लिए 

व्यक्तित्व विकास - Personality Development पर लेख पब्लिश किया था, आशा करते है की उसी तरह आपको यह भी लेख पसंद आएगा !

सफलता के सूत्र - Success Formula


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Success Formula

सेल्फ कॉन्फिडेंस

सेल्फ कांफिडेंस मतलब आत्मविश्वास जिसका आशय है स्वयं पर विश्वास एवं नियंत्रण से है ! दोस्तों हमारे जीवन मे आत्मविश्वास का होना उतना ही जरुरी है की जितना खाने मे बराबर नमक का होना, जिस तरह बिना नमक के खाने का कोई स्वाद नहीं होता मित्रो उसी तरह बिना आत्मविश्वास के बगेर हमरी जिंदगी एक जिन्दा लाश के सामान हो जाती है ! कोई भी मनुष्य कितना भी प्रतिभाशाली क्यों ना हो लेकिन अगर उसमे आत्मविश्वास की कमी के वजह से कुछ नहीं कर सकता ! हमारा आत्मविश्वास ही हमारे सफलता की नीव है, आत्मविश्वास उसी व्यक्ति के पास होता है जो स्वयं से संतुष्ट होता है एव जिसके पास दृढ निश्चय, मेहनत-लगन, साहस एव वचंनबधता आदि संस्कारो की सम्पति होती है ! आत्मविश्वास मे कमी के कारण ही व्यक्ति अपने दवारा किये गए कार्यो पर संदेह करता है, इसलिए दोस्तों हमें जीवन मे सफल होने के लिए जीवन मे कुछ बड़ा करने से पहले अपने अंदर अपने लिए आत्मविश्वास को लाना ही होगा इसे बढ़ाना ही होगा !

आत्मविश्वास कैसे बढ़ाये

अपने अन्दर आत्मविश्वास बढाने के लिए हमें अपनी कुछ आदते बदलनी होगी तो कुछ  सुधारनी भी होगी तथा कुछ नई आदते अपनानी भी होगी तो चलिए जानते है उन्ही कुछ आदतों के बारे मे...

१.     स्वयं पर विश्वास रखे एव अपने लिए एक goal बनाए तथा उसे पूरा करने के लिए वचनबध रहिये ! क्योंकि जब आप अपने goal को पूरा करते हो तो ये हमारे आत्मविश्वास को कई गुना बढ़ा देता है !

२.     सकारात्मक सोचे, विनम्र रहे तथा अपने दिन की शुरुआत किसी अच्छे कार्य से करे !

३.     आत्मविश्वास का सबसे बड़ा दुश्मन है किसी काम को करने मे उसमे असफल होने का डर ! और इस डर को हटाना है तो हमें एसे काम को अवश्य करना है जिसे करने से हमें डर लगता है ! क्योंकि जब तक हम काम को करना आरंभ नहीं करते है तब तक हमें डर लगता है और जब एक बार काम शुरु करते है तो डर धिरे धीरे अपने आप ही ख़त्म हो जाता है इसलिए ये जरुरी है अपने डर को हराने के लिए सबसे पहले अपने डर से डरना बंद करना होगा ! ओ कहते है ना की डर के आगे जीत है !

४.     खुश रहे खुद को प्रेरित करे असफलता से दुखी न होकर उससे शिख ले क्योंकि एक अच्छा experience हमेशा bad experience से ही आते है !

५.     वह कार्य करे जिसमे आप की रूचि हो एव कोशिश करे की अपने करियर को उसी दिशा मे आगे ले के जाए जिसमे अपनी रूचि हो !

६.     सच बोले, इमानदार रहे, धुम्रपान न करे, जरुरतमंद की मदद करे, क्योंकि एसे कार्य आपको सकारात्मक शक्ति एव सोच देते है ! क्योंकि दूसरी तरफ बुरे कार्य एव बुरी आदते हमारे आत्मविश्वास को गिरा देते है !

७.     वर्तमान मे जिए, सकारात्मक सोचे, अच्छे मित्र बनाए अच्छी किताबे पढ़े तथा इनके साथ आत्मचिंतन भी करे !


मेहनत एव लगन

मेहनत यहाँ मेहनत का अर्थ केवल शारीरिक कार्यो से नहीं है, क्योंकि मेहनत शारीरिक एव मानसिक दोनों प्रकार से होती है ! दोस्तों कीसी ज्ञानी ने कहा है की कामयाबी, मेहनत से पहले केवल शब्दकोष मे ही मिल सकती है ! इस लिए दोस्तों कामयाब होने के लिए मेहनत करना भी बहुत जरुरी है ! कामयाब हुवे बहुत से व्यक्तियों का अनुभव यह कहता है की मानसिक मेहनत शारीरिक मेहनत से ज्यादा मूल्यवान होती है ! लेकिन इस का अर्थ ये नहीं की शारीरिक मेहनत का कोई मोअल नहीं है  दोस्तों जरुरत पड़ने पर शारीरिक मेहनत मानसिक की जगह भी ले लेती है, इस लिए दोस्तों हमें कामयाब होने के लिए दोनों तरीके की मेहनत की जरुरत होती है और उस के साथ लगन की भी जरुरत होती है !

कुछ लोग लक्ष्य तो बहुत बड़ा बना देते है लेकिन मेहनत  नहीं करते और फिर अपने अपने लक्ष्य को बदलते रहते है ! एसे लोग केवल योजनाये ही बनाते रह जाते है ! और ये सब होता है मेहनत और लगन मे कमी के कारण !

मेहनत और लगन से बड़े से बड़ा मुश्किल कार्य भी आसान हो जाते है ! अगर लक्ष्य को प्राप्त करना है तो बिच मे आने वाली बढाओ को पार करना होगा, मेहनत करनी होगी, बार-बार दृढ निश्चय से प्रयास करना होगा !

असफल व्यक्ति के पास इन सब परेशानियों से बचने का एक सबसे आसन तरीका या यु कहे एक मात्र साधन यह होता है की वे मुश्किले आने पर अपने लक्ष्य को बदल देते है !

कुछ लोग एसे भी होते है जो मेहनत तो करते है लेकिनेक बार विफल होने पर निराश होकर कार्य को बिच मे ही छोड़ देते है तथा इसके साथ-साथ अगर कोई व्यक्ति बार-बार उस कार्य को करने पर भी सफल नहीं हो पा रहा है तो इसका मतलब उसका कार्य करने का तरीका गलत है एव उसे मानसिक मेहनत करने की आवश्यकता है ! इसलिए मेहनत के साथ-साथ लगन एव दृढ निश्चय का होना भी अति आवश्यक है !


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स्वतंत्रता

यहाँ स्वतंत्रता का अर्थ स्वतंत्र सोच एव आत्मनिर्भरता से है ! एसा इसलिए की यहाँ हम अक्सर अपने जिंदगी के अहम् फैसले अपनी स्वतंत्र सोच से ना लेकर लोगो के सोच को मध्य नजर रख कर करते है, जैसे....

सबसे बड़ा रोग क्या कहेंगे लोग

ज्यादातर लोग कोई भी कार्य करने से पहले कई बार यह सोचते है की वह कार्य करने से लोग उनके बारे मे क्या सोचेगे, क्या कहेंगे और इसीलिए कई बार अपने लिए स्वतंत्र सोच से सही निर्णय नहीं ले पाते है, सिर्फ सोचते ही रह जाते है और देखते ही देखते समय उनके हाथो से रेत की तरह निकल जाता है ! जिसके बाद मे लोग पछताते है ! इसलिए पछताने से अच्छा है स्वतंत्र सोच से सोचे और जो अपने को सही लगे वह कार्य करे ! क्योंकि शायद की कोई एसा कार्य होगा जो आप के साथ सभी लोगो को पसंद आए !

अपने भावनाए और ख़ुशी को नियंत्रण करे

दोस्तों हमारे जीवन का सबसे बड़ी उप्लब्धि क्या है ? हमारे जीवन की सबसे बड़ी उप्लब्धि ख़ुशी है ! क्योंकि हम जो कुछ भी करते है वह अपने ख़ुशी के लिए ही करते है ! और हमारी यह खुशिया अक्सर वर्तमान के परिस्थितियों पर निर्भर करती है ! जैसे किसी का कोई काम पूरा होता है तो वह खुश होता है और वही काम अगर पूरा नहीं होता है तो वह दुखी हो जाता है ! एक तरह से देखा जाए तो इस का सबंध वर्तमान परिस्तिथियों के साथ-साथ हमारी अपनी भावनाओ से भी है ! वह भावना जिस से हम दुखी होते है और इस भावना को हम चाहे तो काबू मे कर सकते है, क्योंकि प्रयास करना हमारे हाथ मे है लेकिन परिणाम या परिस्थितिया हमारे हाथ मे नहीं है ! इसलिए पारिस्थिति प्रतिकूल या अनुकूल कैसी भी हो हमें हर परिस्थिति मे खुश होना चाहिए क्योंकि आपने ये कहावत तो सुना ही होगा की रात कितनी भी अँधेरी क्यों ना हो कट ही जाएगी ! 
   

वर्तमान मे जिए..!

दोस्तों क्या आप जानते है की हमें पुरे दिन मे कितने विचार आते है ? हमें दिन मे ७० हजार से लेकर ९० हजार तक विचार आते है, इसका मतलब यह है की हर सेकण्ड मे एक विचार ! इससे हम ये तो अंदाजा लगा ही सकते है की दिमांग कभी नहीं रुकता है हमारे इस दिमाग मे कुछ ना कुछ विचार हमेशा पनपते ही रहते है भले हम सोते ही क्यों ना रहे, सोते समय यह विचार हमें सपनो के रूप मे आते है ! इन्ही विचारो मे हमारे सफल एव असफल होने के भी विचार आते है, तथा इन्ही विचारो की गुणवत्ता पर हमारी सफलता एव असफलता भी निर्भर करती है !

वैज्ञानिको के अनुसार ज्यादातर लोगो का समय ७०% से ९०% तक भूतकाल, भविष्यकाल एव अन्य की व्यर्थ की बाते सोचने मे चला जाता है ! हा ये बात सत्य है की जीवन मे सफल होने के लिए हमें भूतकाल और भविष्यकाल पर विचार करने की जरुरत है क्योंकि भूतकाल हमें अनुभव देता है और भविष्यकाल हमें आगे के लिए योजनाए (planning) करना सिखाती है ! लेकिन इसका ये मतलब तो नहीं की हम अपना पूरा समय इसी मे व्यर्थ कर दे ! जीवन मे सफल होने के लिए भूतकाल के अनुभव एव भविष्य के लिए किये गए planning को empliment करने के लिए हमें वर्तमान मे ही जीना होगा !

व्यवहार कुशलता

व्यवहार कुशल व्यक्ति जहा भी जाए वहा का माहौल खुशियों से भर देता है, इसलिए एसे लोगो को समाज सम्मान की नजर से देखता है ! व्यवहार कुशल व्यक्तियों की सबसे अच्छी बात यह है की ये लोग सभी से बड़े विन्रम एव एक अच्छी सी मुस्कराहट के साथ मिलते है, तथा  लोगो की हमेशा मदद करने के लिए तैयार रहते है !

हर व्यक्ति के जीवन का सबसे उत्तम तथा सुन्दर एव अहम् पहलूवो मे से एक है शिष्टाचार, जिसके बिना व्यक्ति केवल स्वय तक सिमित हो जाता है ! शिष्टाचार व्यक्ति किसी भी क्षेत्र मे जाए वहा उनके मित्र बन जाते है जो उसके लिए जरुरत पड़ने पर कुछ भी करने के लिए तैयार रहते है !

व्यवहार कुशलता की नीव चरित्र होती है ! जो व्यक्ति की परछाई होती है  एव समाज मे व्यक्ति को उसके चेहरे या नाम से नहीं बल्कि उसके इस चरित्र से पहचाना जाता है ! शायद इसलिए चरित्रहीन व्यक्ति कभी भी शिष्टाचारी नहीं बन सकता ! क्योंकि चरित्र का निर्माण नैतिक मूल्यों, संस्कारों, आदत एव शिक्षा से होता है !

व्यवहारकुशलता का एक और महत्वपूर्ण हिस्सा वार्तालाप दक्षता भी है ! क्योंकि वाणी मे वह शक्ति है जो वातावरण मे मिठास घोल कर उसे खुशियों से भर सकती है तो चाहे उसमे चिंगारी लगा कर आग भी भड़का सकती है !


इसलिए वार्तालाप दक्षता के समय सोच समझकर बोलना, कम शब्दों मे ज्यादा बात कहना, अच्छाई सोचना, व्यर्थ की बाते न करना, दुसरो की बातो को महत्व देना, एव अच्छे से सुनना, अपनी गलतियों को स्वीकारना एव विन्रम रहना भी व्यवहारकुशल व्यक्ति की एक अच्छी निशानी है ! जो व्यक्ति को जीवन मे सफलता की और ले जाने मे अहम् भूमिका रखती है !

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आशा करता हूं दोस्तों आप सब को हमारा यह पाठ जरूर पसंद आया होगा और ऐसे ही रोचक और ज्ञान की बातों के बारे में जानने के लिए आप सब बने रहिए अपने ही Gyanireader..“संपूर्ण ज्ञान का एक उत्तम संगम” के साथ !

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Note :

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                                                                                             ‘धन्यवाद’..!


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