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Tuesday, 4 September 2018

ANGER MANAGEMENT -- क्रोध पर नियंत्रण

ANGER MANAGEMENT  -- क्रोध पर नियंत्रण 

इस लेख मे हमने Reader के लिए कुछ चुनिन्दा टिप्स ANGER MANAGEMENT  -- क्रोध पर नियंत्रण करने के लिए लाये है !  पिछले लेख मे हमने reader के लिए 

      सफलता के सूत्र - Success Formula पर लेख पब्लिश किया था, आशा करते है की उसी तरह आपको यह भी लेख पसंद आएगा !

ANGER MANAGEMENT  -- क्रोध पर नियंत्रण 

कैसे करे क्रोध पर नियंत्रण

ANGER MANAGEMENT 
क्रोध पर नियंत्रण करने के बारे मे बताने से पहले हम आप सब को एक छोटी सी कहानी बताते है जिससे आप सब अच्छे से समझ पायेगे की जीवन मे आगे बढ़ने के लिए क्रोध पर नियंत्रण करना कितना जरुरी है !

ढाई हजार वर्ष पूर्व चीन का एक सम्राट था, जो दम्मी, क्रोधी, एव हठ्ठी स्वभाव का था ! जनता पर अत्याचार भी करता था ! शक्तिशाली भी था, जिसका कोई विरोध भी नहीं कर सकता था !

एक दिन वह सम्राट प्रसिद्ध संत कन्फ्यूशियस के पास गया व् बोला, हे संत मुझे चीन पर शासन करना सिखाइए ! कन्फ्यूशियस उस राजा की क्रोधी प्रवृती से भली भाति परिचित था ! अत: संत बोला राजन पहले अपने ऊपर शासन करना सीख, फिर चीन पर शासन की बात करना !

इस कहानी से हमें ये तो पाता चल गया की सच जो व्यक्ति अपने क्रोध पर शासन नहीं कर सकता, वह किसी पर भी शासन नहीं कर सकता ! तो आईये चलते है अपने ANGER MANAGEMENT के Topic पर..!

क्रोध के चार प्रकार होते है...!

बार-बार तथा अत्यधिक मात्रा मे क्रोध

बार-बार किन्तु कम मात्रा मे क्रोध

कम बार किन्तु अत्यधिक मात्रा मे क्रोध

कम बार तथा कम मात्रा मे क्रोध

पहले प्रकार का क्रोध अत्यधिक हानिकारक होता है, तथा चौथे प्रकार का क्रोध सबसे कम हानिकारक होता है, किन्तु जैसे की हम सबको ये भली भाति पाता है क्रोध कैसा भी हो क्रोध से नुकसान अवश्य होता है ! कई बार यह शरीर, शांति, एव प्रेम के लिए घातक सिध्द हो सकता है !

क्रोध कई बार आंतरिक होता है कई बार बाहरी तथा कई बार दोनों ! यह वर्गीकरण इस प्रकार है...

अंदर व् बाहर दोनों से क्रोध

अंदर क्रोध, बाहर शांति

अंदर शांति, बाहर क्रोध

अंदर शांति, बाहर भी शांत

जब अंदर भी गुस्सा भरा हो तथा उसकी अभिव्यक्ति भी उसी तरह की गई हो तो वह पहली श्रेणी का क्रोध है ! दुसरे प्रकार के क्रोध मे अंदर तो क्रोध है, किन्तु बाहर उसको प्रकट नहीं किया जाता ! यह स्थिति भय अथवा दबाव की स्थिति है अथवा उस विवेक का प्रतीक है जो यह कहता है की क्रोध को अभिव्यक्ति देना तथा उसका प्रदर्शन करना बुद्धिमानी नहीं होता ! तीसरे प्रकार का क्रोध दिखावटी होता ! इसका प्रयोग बच्चो व् अधिनस्थो को सही मार्ग पर लाने के लिए होता है ! चौथा क्रोध तो क्रोध होता ही नहीं, वह तो आंतरिक शांति तथा क्रोध को अनुपस्थिति का प्रतीक है ! यह आत्म-नियंत्रण की आदर्श अवस्था है को आत्म-निरीक्षण एव विवेक से पहुची जा सकती है !

क्रोध पर नियंत्रण  {ANGER MANAGEMENT}


जो व्यक्ति क्रोध पर काबू नहीं पाता, क्रोध उस पर काबू पा लेता है ! क्रोध व्यक्ति को शेख सादी ने आधा पागल व्यक्ति कहा है ! आइये क्रोध को नियंत्रित करने के विभिन्न उपायों पर नजर डाले !

स्वस्थ रहे..!

नियमित दिनचर्या घूमना योग, संतुलित आहार एव यथोचित आराम के फलस्वरूप आप स्वस्थ रहेगे ! स्वस्थ शरीर मे स्वस्थ मस्तिक का वास होता है ! जिससे आप क्रोध के शिकार आसानी से नहीं होंगे !

प्रसन्न रहे..!

मुस्कुराइए, हसिए, ठहाके लगाइए ! हँसते समय भौहे नहीं तनती ! कभी-कभी इस बात पर भी हासिए की छोटी-छोटी बाते भी बड़ी परेशानियों का कारण बन जाती है !

सहनशील बनिए..!       

विरोध, विपत्ति, एव आलोचना को धैर्य से सहिए ! जीवन की यात्रा समतल मार्ग पर नहीं पथरीले एव उबड़-खाबड़ मार्ग से होकर गुजरती है ! जो जीवन की रीत है, उससे क्या खिन्नता ? जीवन मे भी बसंत एव पतझड़ आते है तो आने दीजिये ! निहारिये इस प्रकृति के परिवर्तन को व् मंद-मंद मुस्कुराइए !

अपेक्षाए कम कीजिये..!

अपने आपसे तथा दुसरो से अपेक्षाए कम करना सीखे ! पूर्णता तो केवल प्रभु का गुण है ! मानव तो अपूर्ण है ! जिससे स्नेह करते है उसकी अपूर्णताओ अथवा कमियों को स्वीकारना सीखे !

प्राणायाम कीजिये..!

दिन मे दो बार पांच-पांच मिनट यदि हम प्राणायाम करेगे अर्थात श्वास-नियंत्रण का अभ्यास करेगे तो धीरे-धीरे हमारी प्रकृति मे परिवर्तन होने लगेगा ! परिणामस्वरूप हम अधिक शांत रहने लगेगे !

क्रोध की शक्ति को नवीन मार्ग पर प्रवाहित करे..!

कुछ दार्शनिक क्रोध की शक्ति के सदुपयोग की राय देते है ! वे तो कहते है की क्रोध आए तो ध्यान पर बैठ जाए ! एसी अवस्था मे ध्यान सर्वोत्कृष्ट होगा ! अगर आप ध्यान पर ना भी बैठ तो कोई शारीरिक शक्ति के उपयोग वाला कार्य करने लग जाइये, नहीं तो तेजी से घुमने ही निकल जाइए !

अहंकार त्यागे..!

अहंकारी व्यक्ति अधिकांशतया क्रोधी बन जाते है ! सच पूछे तो हम इतने बड़े कभी नहीं बनते की हम अहंकार करे ! हा गर्व करे, यहाँ तक तो सही है ! ईश्वर तो हम सभी से अधिक शक्तिशाली है, जब वही अहंकारी नहीं, तो हम क्यों हो ? यह भी मान ले की सफलता, चमक-दमक, पद, धन, यश कभी स्थायी नहीं होते ! और जो स्थाई नहीं उस पर अहंकार कैसा ? अहंकार कम होते ही क्रोध कम होता है ! विनम्रता से शांति उत्पन्न होती है !

यथार्थवादी इच्छाए रखे..!

दुनिया की देखा-देखी अपनी अभिलाषाओ को अनियंत्रित न होने दे ! जो अभिलाषा पूरी हो जाए, उसकी पूर्ति का उत्सव मनाइए, जो पूरी न हो, उसका मूल्याकन फिर से करे और अधिक प्रयत्न करे किन्तु हताश न हो ! कोई इच्छा पूरी ना हो तो नए लक्ष्यों पर ध्यान दे !

समीक्षा करे..!

प्रत्येक क्रोध के अवसर के पश्चात उसका मूल्यांकन अवश्य करे - गुस्सा क्यों आया ? आपने कैसा व्यवहार किया ? क्या गुस्सा टल सकता था ? क्या आप शांत रह सकते थे ? इस समीक्षा से ही आप मे परिवर्तन आना आरभ हो जाएगा ! क्रोध के समय के विचारो की समीक्षा आपको अधिक समझदार बनाएगी ! क्रोध के दिन कैलेंडर पर उस तारीख को काट दे ! महीने मे इन गुस्से वाले दिनों को गिने ! धीरे-धीरे क्रोध के दिन कम होने लगेगे !

गुस्सा टाले..!

जब गुस्सा आए, तो उसकी अभिव्यक्ति तुरंत मत करे ! एक मिनट ताल दीजिये ! फिर अगली बार डेढ़ मिनट टाल दीजिये ! बस, धीरे-धीरे क्रोध टालने की आदत हो जायेगी ! टले गुस्से की शक्ति कम होती जाती है ! ठंडे पानी का गिलास पी डालिए ! इस एक मिनट मे गहरी साँस ले ! प्राणायाम से भावनाओ पर नियंत्रण करने मे सहायता मिलती है !


गुस्सा एक मिनट ही करे..!

जब कभी गुस्सा आए तो उसकी समय-सीमा का ध्यान रखे ! एक मिनट तक गुस्सा करने के पश्चात गुस्सा रोक दे ! हो सके तो तनावपूर्ण वातावरण के स्थान को ही छोड़ दे उस समय ! फोन पर गुस्सा न करे ! न ही गुस्से मे फोन बंद करे !

बात खीचे नहीं..!

गुस्सा जब आता है तो उसे जल्दी से जाने भी दे ! उसे अपने मस्तिष्क मे स्थायी स्थान न दे ! जिसे प्याले मे जहर होता है, वह प्याला भी जहरीला हो जाता है ! फिर क्यों करे प्याले को जहरीला ?

व्यक्ति-व्यक्ति मे अंतर करे..!

गिरा गधे से, गुस्सा कुम्हार पर कहावत को चरितार्थ न करे ! जिस की गलती हो, उससे नाराजगी तो ठीक है कुछ समय तक, पर सभी इंसानों के बारे मे गलत राय न बनाए ! एस दुनिया मे अच्छे से अच्छे लोग भी है ! और बुरा व्यक्ति भी हर समय बुरा नहीं होता !

मस्तिष्क को आदेश देना सीखे..!

जब क्रोध आ रहा हो तो उस पर नियंत्रण करना उसी समय अच्छा है ! तनाव के समय अपने आपको निर्देश देना सीखे तुम शांत रहो, गुस्सा ना करो, धैर्य रखो ! बस आदत बन जायेगी ! अपने मित्र स्वय बनना सीखे !


दिल की बात कहना सीखे..!

जीवन मे कोई सबंधी, मित्र, साथी, गुरु, आदि अवश्य रखे जिससे आप मन की बात कह सके ! दुसरो की व्यवहार से खिन्नता होने पर अपने विश्वासपात्र साथी को मन की बात कह दे ! हल्का महसुस करेगे आप तथा सीख भी अवश्य मिलेगी आपको !


अच्छा साहित्य पढ़े..!

धर्म, दर्शन, मनोविज्ञान, जैसे विषय तथा दीपक चौपडा, वेंन डायर, डेल कार्नेगी, स्टीफन कूवी, आनंद कुमार, सत्यकाम विधालंकर, नेपोलियन हिल जैसे लेखको का साहित्य पढ़े ! राम, कृष्ण, बोद्ध, महावीर, ईसा, मोहम्मद, नानक, जरथुस्त्र, गाँधी, मैडम क्युरी, बाबा आम्टे, लिंकन, श्वीटजर, नेल्सन मंडेला, मदर टैरेसा आदि की जीवनिया पढ़े ! इन महान व्यक्तियों ने क्रोध को कैसे जीता यह जानकार आपको प्रेरणा मिलेगी !

क्षमा करना सीखे..!

क्षमा बडन को चाहिए वाली बात याद रखिये ! क्षमतावान व्यक्ति ही क्षमावान हो सकता है ! क्षमा करने वाला व्यक्ति अपने आप महान बन जाता है !

अपने को भी प्यार करे..!

दुसरे आपके साथ अन्याय  करे, आप तो मत करिए अपने आप से ! क्रोध से आपकी हानि होती है ! अपने शक्तियों को सजोए ! दुसरो की गलती हो उससे अपने आप को दंडित न करे !

तोले फिर बोले..!

गुस्से मे सबसे अधिक गलती होती है एसे शब्द बोलने की जिनसे आग मे घी डालने जैसी स्थिति बन जाती है ! गुस्से मे भी सोच-सोच कर धीमी गति से बोले ! चिल्लाए नहीं ! गुस्से से होने वाले नुकसान को कम करना सीखे ! आवेश मे न आए ! एक व्यक्ति गलती करे तो दुसरे को अधिक बुध्दिमान बनना ही पड़ेगा !


दृढ निश्चय कीजिए..!

छोटे लोग छोटी चीजो से परेशान होते है, बड़े लोग बड़ी बातो मे ही रूचि लेते है ! हम भी ऊँचा उठे ! उड़ते हुए गुनगुनाइए, चहचहाइए और फिर मुस्करा कर सोचिए ! क्रोध पर काबू पाने की इच्छा हो तो इस इच्छा की पूर्ति कोई खास मुश्किल काम नहीं !  


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   सफलता के सूत्र - Success Formula




आशा करता हूं दोस्तों आप सब को हमारा यह पाठ जरूर पसंद आया होगा और ऐसे ही रोचक और ज्ञान की बातों के बारे में जानने के लिए आप सब बने रहिए अपने ही Gyanireader..“संपूर्ण ज्ञान का एक उत्तम संगम” के साथ !

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                                                                                             ‘धन्यवाद’..!


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