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Wednesday, 19 September 2018

Child Labour -- बालश्रम समस्या एवं समाधान..!

बालश्रम

भूमिका

बाल श्रम (Child Labour) का तात्पर्य उस कार्य से है जिसे करने वाला व्यक्ति कानून द्वारा निर्धारित आयु से छोटा हो ! बाल श्रम का प्रारंभ औद्योगिक क्रांति की शुरुआत से ही माना जाता है ! प्रायः हर भाषा संस्कृति और देश में सामान्य रूप से पाई जाती है की बच्चे राष्ट्र के भावी कर्णधार होते हैं ! आज के बच्चों में हम आने वाले कल को देख सकते हैं, विलियम वर्ड्सवर्थ ने "बच्चों को आदमी का पिता की संज्ञा" देखकर उनके महत्व को उजागर किया है, इस संबंध में महत्वपूर्ण है कि यदि कोई देश बाल श्रम की समस्या से जूझ रहा है तो उसका भविष्य निश्चित ही अंधकार में होगा ! इसके साथ ही बच्चों का भविष्य खराब होगा ऐसी स्थिति में हम उस देश के अच्छे भविष्य की कल्पना कैसे कर सकते हैं ! कार्ल मार्क्स ने कम्युनिस्ट घोषणापत्र में कारखानों में मौजूदा स्वरूप में बाल श्रम के त्याग की बात कही थी !
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आज शिक्षा का व्यवसायीकरण हो गया है ! निर्धन और असहाय परिवार के बच्चे अपने पेट भरने के लिए किसी भी प्रकार के रोजगार में लग जाते हैं ! कदाचित इन्ही भावनाओं से द्रवित होकर राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त ने कहा था...
     "शिक्षे तुम्हारा नाश हो,
    तु नौकरी के हित बनी !"
अर्थात शिक्षा मस्तिष्क को खोलती है, न्याय को दक्षता प्रदान करती है और सही सुचना प्रदान करके दृष्टिकोण को व्यापक बनाती है ! परंतु शिक्षा को ताक पर रखकर आज विश्व के अमीर या गरीब विकसित या विकाशील सभी देशो मे बच्चो के नन्हे हाथो का प्रयोग धनोपार्जन के लिए किया जा रहा है ! सयुक्त राष्ट्र अंतर्राष्ट्रीय बाल संकट कोष द्वारा हाल ही मे जारी किये गए रिपोर्ट के अनुसार विश्व भर मे 24.6 करोड़ बच्चे बाल श्रमिक के रूप मे कार्य करते है , इनमे 15.2 करोड़ केवल एशिया मे है !

समस्या

भारत में बाल श्रम एक समस्या तो है लेकिन विडंबना यह है कि यहां पहले से ही यह मान कर चला जाता है कि बच्चे इसलिए मजदूरी करते हैं कि इससे उनके परिवार का खर्च चलता है, यह तर्क अपने आप में एक छलावा है इसको सच मान लेने का तात्पर्य यह होगा कि सबसे गरीब परिवार के प्रत्येक बच्चे को स्कूल की पढ़ाई छोड़ कर काम पर लग जाना चाहिए ! जबकि वास्तविकता यह है कि गरीब परिवारों में ऐसे अनेक बच्चे हैं जो स्कूल जा रहे हैं और उनसे बेहतर आर्थिक स्थिति वाले बच्चे काम में लगे हैं ! स्पष्ट है कि गरीबी की दलील की आड़ लेकर बाल श्रम की समस्या से मुंह नहीं मोड़ा जा सकता है !
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गरीब से गरीब माता-पिता भी अपने बच्चों को काम मे लगाने के बजाय उन्हें स्कूल भेजना चाहते हैं लेकिन एसा तभी संभव है जब इसके दुष्परिणाम और समस्या की भयावहता से उन्हें अवगत कराया जाए ! भारत में बाल मजदूरी कहीं प्रगट तो कहीं अप्रगट रूप मे कई रूपों में मौजूद हैं ! भारत में बाल मजदूरी के सही आंकड़े सामने न पाने की एक बड़ी वजह यह है कि बाल मजदूरी को अभी तक सही तरीके से परिभाषित नहीं किया जा सका है ! सरकारी अनुमान के अनुसार आज भारत में लगभग 1 करोड़ 70 लाख बच्चे बाल मजदूरी के शिकार हैं ! अगर खतरे से संबंधित कार्य वाले उद्योगों को भी इसमें शामिल कर लिया जाए तो यह संख्या दो करोड़ तक पहुंच जाएगी ! यदि स्कूल के बाहर सभी बच्चों को बाल श्रमिक माना जाए तो यह आंकड़ा 10 करोड़ के आसपास होगा ! उल्लेखनीय है कि भारत में बाल श्रमिकों की संख्या सर्वाधिक है ! 'कैम्पेन अगेंस्ट चाइल्ड लेबर' संस्था के एक अध्यक्ष के अनुसार भारत में एक करोड़ 26000 से अधिक बच्चे बाल मजदूरी के शिकार हैं ! इस में सर्वाधिक बाल मजदूरी बिहार, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में है ! भारत में 80% बाल श्रमिक ग्रामीण इलाकों में है ! 14 से 17 वर्ष के आयु वर्ग के 63 प्रतिशत बाल श्रमिक खतरनाक व्यवसाय से जुड़े हैं ! बालश्रम रोकने के तमाम दावों के बावजूद भारत अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आई.एल.ओ ) के न्यूनतम आयु संधि 1973 ( संख्या 138) का अनुमोदन नहीं कर पाया है जिसमें वैश्विक स्तर पर बच्चों को काम
पर रखने के जमीनी नियम निर्दिष्ट हैं ! आई.एल.ओ के न्यूनतम आयु से जुड़े निर्देशों का भी भारत में पालन नहीं हो रहा है ! जबकि भारत अनुमोदन कर चुका है 14 वर्ष से कम आयु के बच्चे किसी भी तरह के पेशे में काम पर नहीं रखे जाएंगे ! देश में कुल राष्ट्रीय उत्पाद में बच्चों का बचपन भी खप रहा है ! भारत में हर 11 बच्चों में से एक अपनी आजीविका खुद चलाता है ! यानी वह मजदूरी करता है !
2011 की जनगणना के अनुसार भारत में 8.4 करोड़ बच्चे स्कूल नहीं जाते हैं !
78 लाख बच्चे ऐसे हैं जिन्हें मजबूरन बाल मजदूरी करनी पड़ती है !
बाल श्रम करने वाले बच्चों में 57 प्रतिशत लड़के और 43 प्रतिशत लड़कियां है !
यह जानकारी हैरान करने वाले है कि बाल श्रमिकों में 6 साल तक के बच्चे भी शामिल हैं !
आई.एल.ओ के मुताबिक विश्व में 15 करोड़ बाल मजदूर है ! बाल मजदूरी के काम में लगे आधे बच्चे खतरनाक किस्म के काम में लगे हैं ! दुनिया के कई देशों में तंबाकू, गन्ना, कपड़ा, कपास, कॉफी, ईट आदि उद्योगों के खतरनाक कामों में बच्चों को लगाया जाता है ! इसी के साथ साथ भारत में बच्चों को अगरबत्ती और पटाखा जैसी खतरनाक फैक्ट्री में भी काम दिया जाता है ! जब आम बच्चे तैयार होकर घर से स्कूल के लिए निकलते हैं, तब लाखों बच्चे रोजी-रोटी कमाने के लिए घर से निकलते हैं, उनमें से कई तो वापस भी नहीं लौट पाते हैं ! भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश समेत कई देशों में बच्चे अपना और अपने परिवार का पेट पालने के लिए मजदूरी को विवश है !

समाधान

बाल मजदूरी को समाप्त करने के लिए जिस तरह के बदलाव तैयारी और मुस्तैदी की जरूरत है वह कहीं दिखाई नहीं दे रही है ! सरकार द्वारा बाल श्रम को समाप्त करने तथा बच्चों के संपूर्ण विकास के लिए अनेक प्रयास किए गए एव अभी भी किए जा रहे हैं परंतु इसका स्थाई समाधान नहीं हो सका है !
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यदि इस समस्या का स्थाई समाधान चाहते हैं तो देश के प्रत्येक नागरिक को इस दिशा में सकारात्मक कदम उठाना पड़ेगा ! भारत जैसे देश में बाल श्रम की समस्या अत्यंत जटिल एवं बहुआयामी है, जिस का निदान भी बहुआयामी ही हो सकता ! इसलिए समाज तथा राष्ट्र के नागरिक होने के नाते इस समस्या का समाधान करना हमारा कर्तव्य भी बनता है ! भारत में बाल श्रम निरोधक कानून 1986 से लागू होने के बावजूद बाल श्रम अब तक पूरी तरह समाप्त नहीं हो पाया है ! इसके अतिरिक बाल श्रम (रोक और नियमन) कानून में2006 मे संशोधन कर कई प्रमुख बिंदु जोड़े गए हैं ! भारत सरकार ने नेशनल चाइल्ड लेबर प्रोजेक्ट ( एन.सी.एल.पी ) शुरू किया ! इसके तहत कुछ सार्थक उपाय किए गए ! व्यावसायिक प्रशिक्षण, मिड-डे मील, मानदेय, स्वास्थ सेवाएं आदि सभी योजनाओं को बच्चों के विकास से जोड़ा गया ! बाल श्रमिकों की समस्या बच्चों की शिक्षा से जुड़ी है ! गरीब बच्चों को शिक्षा से जोड़े जाने के लिए उन्हें घर पर ही शिक्षा उपलब्ध कराई जाए या उनके लिए मोबाइल लर्निंग का प्रबंध किया जाए ! बाल मजदूरी की समस्या का समाधान बच्चों को शरणार्थी शिविरों में धकेलना नहीं बल्कि उनके लिए परीक्षण की समुचित व्यवस्था करना है ! इसके लिए आवश्यक है कि खतरनाक व्यवसायों से बच्चों को छुड़ाने की सरकार की कोशिशों को तेज किया जाए ! बच्चों के बेहतर पुनर्वास का मतलब पीड़ित बच्चों को रिहाइश देना या भूख से बचाना ही नहीं है, बल्कि उन्हें मनोवैज्ञानिक और मानसिक रूप से सक्रिय बनाए रखना भी जरूरी है ! बाल मजदूरी पर 24 घंटे सक्रिय तथा मुस्तैद निगरानी व्यवस्था भी आवश्यक है ! कानून का डर और नियमों का सख्ती से पालन जितना जरूरी है अस्थाई सहयोग और निरंतर काउंसलिंग भी उतना ही आवश्यक है !

विश्लेषण

दुनिया के बाल श्रमिकों में एक तिहाई हिस्सा भारत के बाल मजदूरों का है ! अगर हम चाहते हैं कि भारत हर क्षेत्र में आगे बढ़े उसका समग्र विकास हो तो सबसे पहले यह सुनिश्चित करना होगा कि भारत से बाल मजदूरी का उन्मूलन हो और बच्चों को उनका अधिकार मिले ! बाल श्रम की जड़ में गरीबी अशिक्षा अज्ञानता सामाजिक शोषण के तरीके गलत परंपराएं तथा नियोजको और सरकारी श्रम संगठनों में व्याप्त भ्रष्टाचार जैसे बुराई भरे तत्व है ! इन्हें समाप्त करने का अथक प्रयास किया जाए ! यह बात स्पष्ट रुप से सत्य है कि राष्ट्र के स्वस्थ विकास के लिए जरूरी है के बच्चों को असमय श्रम से बचाया जाए जो उनके मानसिक शारीरिक और अध्यात्मिक विकास की राह में बाधक है !



आशा करता हूं दोस्तों आप सब को हमारा यह पाठ जरूर पसंद आया होगा और ऐसे ही रोचक और ज्ञान की बातों के बारे में जानने के लिए आप सब बने रहिए अपने ही Gyanireader..“संपूर्ण ज्ञान का एक उत्तम संगम” के साथ !


                                                                                        धन्यवाद’..!


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