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Tuesday, 11 September 2018

History Of GST – Goods and Services Tax - in India

History Of GST –  Goods and Services Tax - in India


इस लेख मे हमने Reader के लिए History Of GST –  Goods and Services Tax _ in India जैसे Topic पर कुछ महत्वपूर्ण जानकारी साझा कर रहे है, पिछले लेख मे हमने reader के लिए 

      Rajasthan Divash Ka Itihas यह लेख पब्लिश किया था, आशा करते है की उसी तरह आपको यह भी लेख पसंद आएगा !


History Of GST –  Goods and Services Tax - in India

G.S.T

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HISTORY OF GST
३० जून २०१७ को अर्धरात्री को तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी एव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा वस्तु एव सेवा कर (GST) का औपचारिक शुभारम्भ किया गया ! वस्तुतः GST १०१ वे सविधान संशोधन अधिनियम द्वारा अधिनियम द्वारा अधिनियमित तथा १ जुलाई २०१७ को लागु किया गया जो भारतीय कराधान इतिहास के सर्वाधिक एतिहासिक कर सुधारो मे शामिल है ! इसमें कराधान प्रणाली को दुरुस्त करने का प्रयास है, जिस से वस्तुओ एव सेवाओ की आपूर्ति के लिए एक ही कर देना पड़ेगा ! जो सविधान के सहकारी संघवाद के विचार के अनुरूप होगा !

GST क्या है ?

GST एक सरलीकृत कर सरंचना है जो वस्तुओ एव सेवाओ दोनों पर लागु होता है ! यह एक अप्रत्यक्ष कर है ! gst विनिर्माता से लेकर उपभोक्ता तथा वस्तुओ एव सेवाओ की आपूर्ति पर एकल कर है ! इसमे प्रत्येक चरण मे केवल मूल्यवर्धन पर ही कर लगाया जाता है ! तथा करो पर कर की विसंगति को दूर करेगा ! इसके साथ दोहरे कराधान से बचाव हेतू इसके अन्तर्गत इनपुट क्रेडिट का भी प्रावधान किया गया है ! इस प्रकार GST एक गंतव्य एव उपभोग आधारित कर है, जिसमे वस्तु या सेवा के हर चरण यानी उत्पादन से शुरू होकर उपभोग तक लगेगा ! इसमें मुख्य प्रावधान यह है की पूर्व के चरण मे लगे कर का श्रेय आगे मिलता जायेगा और कर का बोझ उपभोक्ताओ द्वारा उठाया जायेगा ! एक राष्ट्र एक कर की संकल्पना पर आधारित GST केन्द्र तथा राज्य के अप्रत्यक्ष करो को एक साथ मिलाकर सम्पूर्ण भारत को एक संगठित बाजार का स्वरूप देता है !


सरचना...

सरलीकृत कर प्रणाली की दृष्टी से वस्तु एव सेवा कर GST को तीन हिस्सों मे बाटा गया है ! जो निम्न प्रकार है..


            GST
   ________________| |___________________
   |                   |                      |
सी.जी.एस.टी       एस.जी.एस.टी           आई.जी.एस.टी
   |                  |                      |
केन्द्र लजाएगा     राज्य लगाएगा         राजस्व का वितरण केन्द्र
व् संग्रह करेगा !   व् संग्रह करेगा !          व् राज्य के मध्य !

GST का सफ़र

देश मे GST को १३ वर्ष की लम्बी यात्रा के बाद लागू किया गया, क्योंकि अप्रत्यक्ष करो पर गठित केलकर कार्यबल मे केन्द्रीय स्तर पर अप्रत्यक्ष करो जैसे सेनवैट सेवाकर इत्यादि के स्थान पर एकल कर यानी वस्तु एव सेवा कर लगाने की सिफारिश की ! वित्त वर्ष २००६-०७ के बजट भाषण मे १ अप्रैल २०१० से रास्ट्रीय स्तर पर वस्तु एव सेवा कर लागू करने का प्रस्ताव किया गया था, इसलिए GST को लागु करने की रूप रेखा बनाने की जिम्मेदारी राज्य वित्त मंत्रियो की अधिकार प्राप्त समिति को सौपी गयी थी ! इस समिति के रिपोर्ट तथा GST के विभिन्न पहलुओ पर विचार विमर्श करने के पश्चात संसद द्वारा वस्तु एव सेवा कर विधेयक को पारित कर दिया गया तथा १ जुलाई २०१७ को इसे पुरे देश मे लागू कर दिया गया !

GST महत्त्वपूर्ण क्यों ?

देश मे विभिन्न स्तरों पर वस्तुओ एव सेवाओ पर करो की वसूली के लिए कानून बनाने हेतू सविधान मे केन्द्र और राज्यों को अलग-अलग अधिकार दिए गए है, जिससे भारत मे करो की बहुलता है और यह व्यवस्था पूरी अप्रत्यक्ष कर प्रणाली को जटिल बना देती है ! उपभोक्ताओ की दृष्टि से भी करो की बहुलता के कारण वस्तु महंगी हो जाती है !
GST से मौजूदा अप्रत्यक्ष करो के जाल से मुक्ति मिलेगी, और एकल अप्रत्यक्ष कर उसका स्थान लेगा जिससे कर अनुपालन आसान व् सस्ता हो जाएगा ! आर्थिक विकास मे जटिलताओ को दूर करने की दिशा मे GST इसलिए भी महत्वपूर्ण है की यह बिक्री के स्तर पर वसूला जाएगा और निर्माण लागत पर लगाया जाएगा ! इससे राष्ट्रीय स्तर पर वस्तुओ और सेवाओ के बाजार मूल्य मे समानता के साथ-साथ दोनों के मूल्य मे कमी आएगी ! इस प्रकार वस्तुओ एव सेवाओ की मांग मे वृध्दि होगी ! कुल मिलाकर यह कर प्रणाली मांग आपूर्ति श्रृखला को प्रभावित कर जहा एक और प्रति व्यक्ति आय मे वृध्दि करगी वही सरकार के बजटीय और राजकोषीय घाटे मे कमी लाएगी !

जीएसटी के स्लैब

वर्तमान में जीएसटी के तहत सभी वस्तुओं और सेवाओं को 5 समूहों में बांटा गया है !उपभोक्ताओं की दृष्टि से अति आवश्यक वाली वस्तुओं जैसे खाद्यान्न शिक्षा व स्वास्थ्य सेवाएं दूध दही आदि को कर से छूट प्रदान की गई है ! शेष वस्तुओं के समूह को उनकी उपयोगिता के अनुसार 5% ,12% और 28% के कर स्लैब में रखा गया है ! जी.एस.टी के अंतर्गत व्यापारियों को भी वर्गीकृत किया गया है पूर्वोत्तर के सात राज्य (असम अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, नागालैंड, मिजोरम व सिक्किम) व तीन पहाड़ी राज्यों (जम्मू कश्मीर, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश) के कारोबार की वार्षिक सीमा 10 लाख रुपए तथा शेष राज्य में 20 लाख रुपए तक का वार्षिक कारोबार करने वाले व्यापारियों को जी.एस.टी के दायरे से बाहर रखा गया है !

जीएसटी में शामिल कर..!

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HISTORY OF GST
केंद्रीय कर
केंद्रीय उत्पाद शुल्क
अतिरिक्त उत्पाद शुल्क
अधिभार एव उपकर
अतिरिक्त सीमा शुल्क
विशेष अतिरिक्त सीमा शुल्क
सेवा कर

राज्य कर
केंद्रीय बिक्री कर
चुंगी और प्रवेश कर
क्रय कर
विलासिता कर
वेट/ बिक्री कर
लॉटरी सट्टा एव जुए पर कर
मनोरंजन कर (स्थानीय निकायों द्वारा लागू करो को छोड़कर)
अधिभार एवं उपकर

जीएसटी के दायरे से बाहर रखे गए कर
मानवीय उपभोग के लिए शराब पर कर !
5 पेट्रो उत्पादों (अपरिवकृत पेट्रोलियम, उच्च गति डीजल, मोटर स्प्रिट, प्राकृतिक गैस तथा विमान ईंधन) को अस्थायी रूप से जीएसटी के दायरे से बाहर रखा गया है !
इस प्रकार देश में जीएसटी के संघीय स्वरूप को अपनाया गया है जहां केंद्र और राज्य
दोनों देश के लाभ के लिए काम करें ! जीएसटी के तहत सभी अप्रत्यक्ष करों को एक छत के नीचे लाया गया है जिससे विनिर्माण को एक ही देश मे अलग-अलग करो के झमेलो से बचाया जा सके और वस्तुओं की आवाजाही आसान हो !

जीएसटी के लाभ
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HISTORY OF GST
एक समान भारतीय बाजार निर्मित करने तथा वस्तुओं एवं सेवाओं के मूल्यों पर कर के व्यापक प्रभाव को कम करने के लिए जीएसटी भारतीय अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण साबित होगी ! इसके तहत न केवल उपभोक्ता एवं उत्पादक हितों का संरक्षण होगा बल्कि कर प्रशासन में सरलता मितव्ययिता एव पारदर्शिता भी आएगी ! यही कारण है कि जी.एस.टी को भारतीय कर व्यवस्था में स्वतंत्रता के बाद के सबसे बड़े सुधार के रूप में देखा जा रहा है ! जीएसटी के लाभों को निम्न बिंदुओं के तहत देखा जा सकता है..!

व्यापार और उद्योग के लिए

जीएसटी के माध्यम से देशभर में अप्रत्यक्ष कर की दरें और संरचनाएं एक जैसे हो जाएंगे जिससे व्यापार करने में सुगमता होगी ! जी.एस.टी में केंद्रीय और राज्य स्तरीय करो को एक व्यवस्था के अंतर्गत लाकर वस्तुओं और सेवाओं पर लगने वाले बहुकर प्रणाली को समाप्त कर दिया गया जिससे लागत में कमी आएगी ! इससे अंतर्राष्ट्रीय बाजार में भारतीय वस्तुओं और सेवाओं की प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और भारतीय निर्यातकों को बढ़ावा मिलेगा ! विनिर्माताओं एवं व्यापारियों हेतु कर अनुपालन आसान होगा क्योंकि पंजीकरण रिटर्न तथा भुगतान ऑनलाइन होगा !

उपभोक्ताओं के लिए
विनिर्माताओं से उपभोक्ता एक एकल एवं पारदर्शी कर वस्तुओं की कीमतों में कमी लाएगा ! कर चोरी को रोकने तथा वस्तुओं पर कर का बोझ कम होने से उपभोक्ताओं पर पड़ने वाले कर भार में कमी आएगी तथा उनके बचत में वृद्धि होगी !

सरकार के लिए
जीएसटी के कारण कर प्रशासन सरल व आसान हो जाएगी ! जीएसटी सरकार की कर राजस्व को एकत्रित करने की लागत में कमी आएगी उससे राजस्व एकत्रित करने की क्षमता बढ़ जाएगी ! कर प्रशासन की दक्षता एवं पारदर्शिता में वृद्धि होगी !

अर्थव्यवस्था के लिए

जीएसटी के कारण संपूर्ण अर्थव्यवस्था एकल बाजार में रूपांतरित हो जाएगी इससे विदेशी निवेश को आकर्षित करने में मदद मिलेगी ! जी.एस.टी के लागू होने से कर प्रणाली अत्यधिक सरल तथा लोगों के लिए अनुकूल होगी और उसका उल्लंघन करना कठिन हो जाएगा इसके लागू हो जाने से देश में एक राष्ट्र एक कर प्रणाली की पद्धति प्रारंभ हो गयी !

वस्तु एव सेवा कर नेटवर्क GSTN

जी.एस.टी के कार्यन्वयन के लिए IT आधारित सुविधाओं और सेवाओं को उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सरकार ने GNTN की स्थापना की है यह एक लाभ रहित गैर सरकारी कंपनी है ! इसके अंतर्गत करदाताओं का पंजीकरण कराकर 15 अंकों का एक GNTN प्राप्त करना होगा !

जीएसटी के अनुपालन में कठिनाइयां

भारतीय कर व्यवस्था की जटिलता को देखते हुए कहा जा सकता है कि इसके अनुपालन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है...
जीएसटी के तहत तीन प्रकार के कर है ! अत: उनके बीच सामंजस्य बिठाना महत्वपूर्ण है और शुरुआती दौर में यह बाजार को प्रभावित करेगा जिससे कीमतों के उतार-चढ़ाव की प्रवृत्ति देखने को मिलेगी ! ऑनलाइन व्यवस्था होने के कारण इस के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती सूचनाओं की गोपनीयता एवं सुरक्षा की है क्योंकि विगत समय में वित्तीय संस्थाओं पर साइबर हमले काफी बढ़ गए हैं !

विश्लेषण

विश्व बैंक ने जीएसटी को एक गेम चेंजिंग आर्थिक सुधार कहां है ! वस्तुतः जीएसटी की वास्तविक सफलता आय भारतीय उपभोक्ता पर पड़ने वाले प्रभाव पर निर्भर करती है ! जीएसटी का सारांश यह है कि सभी वस्तुओं एवं सेवाओं पर परिष्कृत दर पर कर लगेगा ! एक राष्ट्र एक कर सकारात्मक अर्थों में निर्णायक सिद्ध होगा और केवल आम आदमी के लिए ही नहीं बल्कि पूरे देश के लिए लाभदायक सिद्ध होगा ! जब भी कोई नया कानून लागू होता है तो निश्चित रुप से उसका प्रभाव खास तौर से आम आदमी पर पड़ता है ! जीएसटी के मामले में भी यही बात लागू होती है जिसमें वस्तुओं का अंतिम उपभोक्ता आम आदमी ही है ! इसके लागू होने के बाद सीधे तौर पर वही प्रभावित होगा ! हम आशा करते हैं कि जीएसटी एक सकारात्मक प्रभाव छोड़ेग और तेजी से आगे बढ़ने में भारतीय अर्थव्यवस्था की मदद करेगा तथा सहज कर व्यवस्था के साथ भारत को एक एकीकृत राष्ट्रीय बाजार में तब्दील कर देगा ! उभरती हुई भारतीय अर्थव्यवस्था आम आदमी के वित्तीय विकास में सहायक होगी !


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