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Saturday, 19 January 2019

दलित चेतना का विकास तथा दलितों के सशक्तिकरण के लिए आंदोलन.. !

दलित चेतना का विकास तथा दलितों के सशक्तिकरण के लिए आंदोलन.. !


इस लेख मे हमने Reader के लिए दलित चेतना का विकास तथा दलितों के सशक्तिकरण के लिए हुए आंदोलन से जुड़े कुछ अहम जानकारी साझा कर रहे है, तथा यह आशा करते है की  reader के लिए दलित चेतना का विकास तथा दलितों के सशक्तिकरण के लिए आंदोलन.. ! पर साझा की गई जानकारी जरुर पसंद आएगी !


Dalit Chetna
ब्रिटिश शासन की स्थापना ने समाज को गहरे स्तर पर प्रभावित किया ! इसने समाज की नवजागरण का दौर लाने मे एक महत्वपूर्ण भूमिका अदा किया ! जिसके फलस्वरूप जाती-प्रथा जैसी सामाजिक बुराइयों पर कड़ा प्रहार हुआ ! जिसने दलित आंदोलन की पृष्ठभूमि निर्मित कर दी ! ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन काल मे अनेक एसी शक्तियां निर्मित की जिसने जाती-प्रथा पर चोट किया ! उदाहरणस्वरूप आधुनिक उद्योग व् रेल्वे का आगमन, बढ़ते हुए नगरीकरण, जमीन की मुक्त बिक्री प्रशासन के क्षेत्र मे कानून की समानता तथा नई शिक्षा प्रणाली ! इन सारे कारणों ने सामाजिक गतिशीलता को तीव्र कर दिया ! फिर भारतीय अतीत मे बौद्ध धर्म, जैन धर्म, तथा भक्ति आंदोलनों का इतिहास भी इस परिवर्तन को प्रेरित कर रहा था ! इसके अतिरिक्त 19 वी शताब्दी के सामाजिक-धार्मिक आंदोलनों ने भी जाती-प्रथा, छुआ-छुत प्रथा, सती प्रथा जैसी अनेक सामाजिक कुरीतियों पर कड़ा प्रहार कर रहा था !

निम्न जाती आंदोलन के लिए 1901 की जनगणना ने उत्प्रेरक का काम किया ! फिर 1980 के दशक के बाद चुनावी राजनीति मे क्रमशः समावेश के कारण इस प्रकिया को बहुत बल मिला !

उपर्युक्त कारको ने दलित चेतना उभारने मे महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह किया ! दलितों को सशक्त बनाने मे बम्बई के बाल शास्त्री जांबेकर प्रथम सुधारको मे से थे, जिन्होंने ब्राह्मणवादी कट्टरता की कड़ी आलोचना की और हिन्दुओ की आम प्रथा मे सुधार लाने की कोशिश की ! 1832 मे उन्होंने दर्पण नाम से एक साप्ताहिक पत्र का प्रकाशन आरंभ किया ! इसी क्रम मे 1849 मे महाराष्ट्र मे परमहंस मंडली की स्थापना की गई ! इसके संस्थापक आस्तिक थे तथा मूलरूप से उनकी दिलचस्पी जातपात तथा छुआछुत के बंधनों को तोड़ने मे थी ! जब इसकी बैठक होती थी, तब इसके सदस्य तथाकथित निम्न जातियों के हाथ का पकाया हुआ भोजन करते थे ! इसी क्रम मे आगे दलितों को सशक्त करने मे महाराष्ट्र मे ज्योतिबा फूले के नेतृत्व मे एक सशक्त आंदोलन चला ! उन्होंने "सत्यशोधक समाज" की स्थापना की ! ज्योतिबा फूले ने महाराष्ट्र मे ब्राहम्ण विचारधारा विरोधी आंदोलन शुरू किया ! इन्होने ब्राह्मणवाद तथा आडम्बर पर तथा जाति प्रथा पर कठोर प्रहार किया तथा  दलितों और निम्न जातियों को सशक्त करने के लिए उनके कल्याण और अधिकार की बात की ! ज्योतिबा फूले ने अपनी गुलामगीरी तथा सार्वजनिक सत्य धर्म पुस्तक जैसी पुस्तको मे निम्न जातियों तथा दलितों को पाखण्डी ब्रह्मणों एव उनके अवसरवादी धर्म ग्रंथो से सुरक्षा दिलाने की आवश्यकता पर जोर दिया !

19 वी शताब्दी मे महार जाति के लोगो ने भी जो आगे चलकर अम्बेडकर के आंदोलन का आधार बने ! इन्होने पहले अपने आप को गोपाल बाबा वलंगकर के नेतृत्व मे संगठित किया ! इन्होने दलितों को क्षत्रिय का दर्जा देने तथा उन्हें अधिकतम नौकरी देने के लिए मांग की ! 20 वी सदी मे अम्बेडकर ने महारो को संगठित किया ! इन्होने दलितों के कल्याण एव अछूतोंउद्धार हेतु अखिल भारतीय दलित वर्ग की स्थापना की तथा बहिष्कृत भारत नामक पाक्षिक पत्रिका का प्रकाशन किया ! फिर उन्होंने दलितों के कल्याण तथा सशक्त बनाने हेतु उनके राजनीतिक अधिकार दिलाने के लिए लम्बा संघर्ष किया !

आगे दलितों एव अछूतों के उत्थान हेतु गांधीजी ने भी कई कार्य किये ! सर्वप्रथम गांधीजी ने हरिजन महासंघ की स्थापना की फिर इन्होने अस्पृश्यता विरोधी लीग की स्थापना कर दलितों के अधिकारों को स्थापित किया !

19 वी शताब्दी के अंत तक दक्षिण भारत मे दलितों को सशक्तिकरण के लक्ष्य को मजबूती प्रदान करने मे दक्षिण भारत मे कई महत्वपूर्ण आंदोलन चलाया गया ! केरल मे नारायण गुरु, एन. कुमारन, टी.के माधवन जैसे बुद्धिजीवी लोगो ने छुआछुत के खिलाफ आवाज उठायी ! केरल मे वायकोम नामक गाँव मे मंदिर प्रवेश को लेकर सर्वप्रथम आंदोलन हुआ ! श्री नारायण धर्म परिपालन योगक्षेम संगठन ने श्री नारायण गुरु के नेतृत्व मे मंदिर प्रवेश का समर्थन किया ! वायकोम सत्याग्रह मे बी. रामास्वामी, के.पी. केशव मेनन तथा गाँधी जी ने हिस्सा लिया, जिससे अंततः गाँधी जी की मध्यस्थता मे त्रावणकोर की महारानी से मंदिर मे प्रवेश के बारे मे आंदोलनकारियो से समझौता हुआ ! दलित और पिछडो को लेकर केरल मे एक और आंदोलन गुरुवापर सत्याग्रह के कल्पपण के नेतृत्व मे हुआ ! आगे पी. कृष्ण पिल्लै, ए.के. गोपालन जैसे नेताओ ने इस आन्दोलन को नेतृत्व प्रदान किया, अंततः समझौता होने के पश्चात सभी मंदिरों को सभी हिन्दू जाती के लिए खोल दिया गया, जो दलित को कुछ हद तक सशक्त करने मे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई !

तमिलनाडु मे दलितों को राजनीतिक अधिकार दिलाने के लिए जस्टिस आंदोलन की शुरुआत हुई ! आगे मद्रास मे जस्टिस पार्टी के अधिजनवाद के विरोध के लिए लोकप्रिय व् जुझारू विकल्प प्रस्तुत किये ! ई.वी रामस्वामी नायकर ने इस क्रम मे कुदि आरसु पत्रिका निकाली तथा आत्मसम्मान आंदोलन शुरू की ! इन्होने मंदिरों मे जबरदस्ती प्रवेश के लिए मनुस्मृति को जलाने के लिए आंदोलन चलाए !

इस प्रकार हम देखते है की एसे ही अनेक कारण थे जो दलित चेतना के विकास मे योगदान दिया तथा दलितों के सशक्तीकरण के लक्ष्य को सामने रखने वाले उपर्युक्त प्रमुख आंदोलन भी हुए !


                                                                                                                   
    

                               संतोष कुमार पासी 
                         Civil Service Aspirant (UPSC)
                               संस्थापक सदस्य 
                      आभास महासंघ मिशन 24 कैरेट (NGO)
                            [एक कदम मानवता की ओर]
                            Cont.. 9137207484







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                                                                                             धन्यवाद’..!

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