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Wednesday, 20 February 2019

WOMEN'S EMPOWERMENT. महिला सशक्तिकरण..|

महिला सशक्तिकरण

Women's Empowerment


क्या है महिला सशक्तिकरण?

महिला सशक्तिकरण राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक, भौतिक, अध्यात्मिक, शारीरिक तथा मानसिक सभी स्तर पर महिलाओं मे आत्मविश्वास पैदा कर उन्हें सशक्त बनाने की प्रकिया है | जिसे व्यापक रूप से संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा परिभाषित किया गया है | संयुक्त राष्ट्र संघ के अनुसार महिला सशक्तिकरण से तात्पर्य महिलओं मे आत्ममूलय की भावना विकल्प निर्धारित करने का आधिकार घर के भीतर एव बाहर दोनों स्थानों पर अपने जीवन को नियंत्रित करने के अधिकार के साथ ही राष्ट्रीय एवं अंतराष्ट्रीय स्तर पर अधिक न्यायोजित सामाजिक आर्थिक व्यवस्था के सृजन हेतु योग्यता के होने से है |

किन्तु अभी भी उक्त अधिकारों का पूर्णतया उपयोग महिलाएं नहीं कर पा रही है, एसे मे यह प्रश्न उठ खड़ा होता है की महिलओं की सशक्त करने की आवश्यकता ही क्यों उत्पन्न हुई ?
इसका उत्तर हमें विभिन्न कालकर्मों के अवलोकन से प्राप्त हो सकेगा | जैसे :

प्राचीन भारतीय समाज मे महिलाओं की स्थिती
प्राचीन भारतीय समाज मे महिलओं की स्थिति की बात करे तो उन्हें अत्यंत सम्मानीय स्थान प्राप्त था | हड़प्पा सभ्यता मे मातृसत्तात्मक परिवार एवं मातृदेवी की पूजा जैसी अवधारणा इस बात का प्रमाण है |

ऋग्वेदिक कालीन राजनीतिक अंग सभा मे महिलाओं की उपस्थिति उन्हें प्राप्त राजनितिक अधिकारों की ओर संकेतित करती है, जिससे उनकी बेहतर सामजिक स्थिति का अनुमान स्वत: ही लगाया जा सकता है |

किन्तु उत्तर वैदिक युग के उदय के साथ ही तत्कालीन बदलती राजनीतिक सामजिक व्यवस्थओं के कारण महिलओं की स्थिति मे पतन होना आरंभ हो गया, समाज मे लैंगिक असमानता बढ़ती गई एवं मध्यकाल तक आते-आते उनकी स्थिति अत्यंत दयनीय हो गई | एसे मे यह प्रश्न उठ खड़ा होना भी लाजमी है वर्तमान मे उनकी स्थिति एवं महिलओं के प्रति समाज का नजरिया कैसा है ?

महिलओं के प्रति समाज का नजरिया ?

लडकियों एवं महिलओं के खिलाफ हिंसा की शुरुआत उनके जन्म से पहले से ही हो जाती है | बाल अधिकार एनजीओ सीआरवाई के अनुसार भारत मे प्रत्येक 15 मिनट पर एक बच्चा यौन अपराध का शिकार होता है | आखिर क्यों हमारा समाज, हमारी सोच इतनी स्खलित हो गई है ? दरअसल यह हमारी पौरुष वर्चस्व वाली मानसिकता है, जो नारी को हमेशा अपने से कमजोर समझने व् उसे अपने अधीन रखने की सदियों की प्रवृत्ति से ग्रसित है, जिससे आज भी हम निकल नहीं पाए है | यही कारण है कि जन्म से पहले से ही महिलाए भेदभाव का शिकार हो जाती है, और फिर जीवन भर उनके साथ घर मे, संस्थानों मे, सार्वजनिक जगहों पर,हिंसा का यह क्रम चलता रहता है | परिवार मे बेटियों के साथ भेदभाव विभिन्न व्यवहारों के माध्यम से अंजाम दिया जाता है, जिनमे शामिल है बेटियों एव बेटो के बीच पारिवारिक संसाधनों के वितरण स्कूलों मे नामांकरन, टीकाकरण एवं सामजिक रहन-सहन जैसे अन्य क्षेत्रों मे असमानताओं के अलावा भ्रूण हत्या, बाल हत्या, दहेज़ हत्या के नाम पर महिलाएं अक्सर आजीवन हिंसा का शिकार होती रहती है |

निश्चित रूप से यह रिपोर्ट चौकाने वाली है अपितु हकीकत बयान करने वाली है | निश्चित रूप से हमें इस पर न केवल गभीरता से सोचने की जरुरत है अपितु इसके लिए उत्तरदायी कारकों की तह तक जाकर वास्तविक समाधान भी खोजने की जरुरत है | “बेटी बचाओं बेटी पढ़ाओ” के स्लोगन को मूल रूप देने की जरुरत है |

यह ध्यान रहे की इस तरह की सभी घटनाओं को रिपोर्ट भी नहीं किया जाता, क्योंकि घर की इज्जत और मूछ और पगड़ी की बात के नाम पर एसी घटनाओं को दबा दिया जाता है | एसे मे इस तरह की घटनाएँ वास्तविकता से कही अधिक होगी |

एसा क्यों है की बलत्कार एक आम घटना हो गई है ?

महिलाओं के ऊपर पुरुष की हिंसा उसके विशेषाधिकार का हिस्सा माना जाता है और इस पर सवाल भी नहीं उठाएं जाते | बलत्कार पुरुष हिंसा व् प्रभुत्त्व की संस्कृति की उपज है |

परिस्थितियां एवं कारक जो बलात्कार जैसी घटना को आम बना देती है | उन पर विचार करने की जरुरत है | वही इस तरह बलात्कार रोकने के लिए सार्वजनिक स्थलों पर बेहतर प्रकाश की सुविधा, पुलिस की मौजूदगी, बेहतर निगरानी जैसी दलीले भी दी जाती है |

महिला सश्क्तिकरण के मार्ग मे आने वाली बाधाए अत्यंत विकट है, जिनके अंतर्गत सभी क्षेत्रों मे लैंगिक असमानता, परंपरागत रुढ़िवादी मानसिकता का होना एवं महिलओं की योग्यता पर संदेह करने की प्रवृति महिलओं मे अपने अधिकारों के प्रति जागरूकता का अभाव आदि को सम्मिलित किया जा सकता है | 

राजनीतिक सहभागिता की जरुरत

महिला सशक्तिकरण की जितनी चुनौतियाँ है, संभावनाए उतनी ही अधिक है क्योंकि पिछली एक सदी और वर्तमान की यदि तुलना की जाए तो कुछ सकारात्मक मूलभूत बदलाव दृष्टव्य हुए है तथा पितृसत्तात्मक सोच की दीवार कमजोर हुई है | विभिन्न स्तर पर किये गए प्रयासों का ही प्रभाव हुआ है की पंचायती राज्यव्यवस्था मे महिलाओं को आरक्षण देने का निर्णय सफल रहा है |

19 वी सदी मे विभिन्न समाज सुधारकों के तमाम प्रयासों एव आजादी के संघर्ष के दौरान तथा स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात किये गए प्रयासों के बावजूद वर्तमान मे उनकी स्थिति पुरुषों के मुकाबले सामजिक, आर्थिक, राजनीतिक, तथा शैक्षणिक रूप से अत्यंत कमजोर है | इसके पीछे मुख्य कारण राजनीति मे उनकी उचित सहभागिता का अभाव है | जिसकी पुष्टि इटर-पार्लियामेंटरी यूनियन की रिपोर्ट के माध्यम से की जा सकती है, जिसके अनुसार भारतीय संसद मे महिलाओं के प्रतिनिधित्व के मामले मे भारत दुनिया के 193 देशों मे 148 वे स्थान पर है | एसे मे यह कहना उचित ही होगा की महिला अधिकारों एवं उनसे जुड़े मुद्दों को सहज अभिव्यक्ति नहीं मिल पाई है | जिसका परिणाम अन्य क्षेत्रों मे उनकी सीमित सहभागिता के रूप मे देखा जा सकता है |

वर्तमान परिदृश्य मे महिलाए पूर्व की तुलना मे नि:संदेह सशक्त हुई है किन्तु अभी भी सशक्तता की ओर अग्रसर करने के लिए उनकी राजनीतिक सहभागिता को बढ़ाना होगा | क्योंकि महिला सशक्तिकरण राजनीतिक सहभागिता के बिना संभव नहीं है |

क्यों जरुरी है महिला सशक्तिकरण ?

भारत अपने जनसांख्यिकीय लाभ का फायदा उठाने की तरफ देख रहा है | एसे मे सशक्त महिलाओ की भूमिका काफी अहम् हो जाती है | शिक्षा और सार्थक रोजगार के जरिये हम सार्वजनिक जीवन मे ज्यादा से ज्यादा महिलओं की संक्रिय भूमिका और राष्ट्र निर्माण मे उनके योगदान की उम्मीद करते है | क्योंकि देश की कुल आबादी मे महिलाओं की हिस्सेदारी तक़रीबन 50 फीसदी है | एसे मे महिलाओं के सशक्तिकरण के बिना विकास की यात्रा संभव नहीं हो सकती | देश को नई राह पर ले जाने के लिए बहुस्तरीय संगठित रवैये के साथ महिला सशक्तिकरण की आवश्यकता है |

वर्तमान मे मतदान की प्रकिया मे महिलाओं की प्रतिशतता अधिक है, बड़ी संख्या मे निचले स्तर पर सार्वजनिक कार्यालयों मे महिलाएं उपस्थित है, हमारी कुल आबादी का एक या दो फीसदी लडकिया ही खेलों के मैदान तक पहुँचती है | जिसके बावजुद ये बड़ा अंतर पैदा कर रही है | जगह-जगह वे देश के लिए गर्व की वजह बन रही है | तथा ये महिला सशक्तिकरण के मामले मे नई अलख भी जगा रही है | खेलों से जुड़ी बहुत सी संस्थाए और एनजीओ मान रहे है की खेल महिला सशक्तिकरण का सबसे असरदार हथियार बन रहा है | भारतीय महिलाओं ने पिछले कुछ बरसों मे खेलों मे ना केवल देश को गर्व दिया बल्कि यह भी दिखा दिया की वह किसी से कम नहीं है | इसके अलावा पुलिस बलों मे महिलाओं की उपस्थिति, सैन्य एव अर्ध सैन्य बलों मे भी महिलाओं की भूमिका उनकी सक्षमता एवं योग्यता का प्रमाण है | अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओ मे भारत के पर्दर्शन को देखे तो महसूस होता है की हमारी लडकियों और महिलओं मे अपार ऊर्जा और क्षमता है बस कसर है तो आगे बढ़ने के लिए मौका देने और अनुकूल माहौल उपलब्ध कराने की | क्योंकि एक प्रगतिशील समाज का निर्माण महिलाओं की बराबर सहभागिता के बिना संभव नहीं है |

महिला सशक्तिकरण के लिए किये जाने वाले बदलाव

सामजिक बदलाव के बिना आर्थिक प्रगति अधूरी है | महिलाओं के प्रति पौरुष वर्चस्व वाली मानसिकता ने आज तक महिलाओं की गरिमा, आर्थिक रूप से आत्मनिर्भरता एव राजनीतिक भागीदारी को सहज रूप से अभिव्यक्त नहीं होने दिया है | हालाकि उक्त बाधाओ को दूर कर महिलाओं को समानता के पथ पर अग्रसर करने के लिए वैश्विक स्तर के साथ ही राष्ट्रीय एवं राज्य स्तर पर भी अनेक प्रयास किये गए है | वैश्विक स्तर पर नारीवादी आंदोलनों एवं यूएनडीपी आदि अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओ ने महिलाओ की सामाजिक क्षमता, स्वतंत्रता, न्याय के राजनीतिक अधिकारों को सुनिश्चित करने मे अहम् भूमिका निभाई है |

इसके अतिरिक्त, हमारा सविंधान की प्रस्तावना मे महिलाओं की गरिमा को सुनिश्चित किया गया है एव मूल अधिकारों, तथा समानता के अधिकार की तथा लैंगिक आधार पर भेदभाव का शिकार नहीं होने के अधिकार की गारंटी देता है | इसके अलावा राज्य के निति निदेशक तत्वों के माध्यम से महिलाओं को सशक्त बनाने का प्रयास किया गया है | साथ ही स्थानीय स्वशासन मे महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए पंचायतों मे एक-तिहाई सीटों पर आरक्षण दिया गया |

सशक्तिकरण का एक अहम् पहलू सुरक्षा है | अगर महिलाएं सुरक्षित महसूस करती है तभी वे अर्थव्यवस्था और सार्वजनिक जीवन मे पूरी तरह से भागीदारी निभा पाने मे सक्षम होगी | महिलाओं की सुरक्षा एवं उनकी वर्तमान स्थिति मे सुधार करने के लिए अनेक विधायी प्रयास भी किये गए, यथा-कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम 2013; पीसीपीएनडीटी एक्ट, बाल विवाह रोकथाम अधिनियम, 2006; IPC 354, मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ़ प्रेगनेंसी एक्ट आदि जिनसे महिलाओं की स्थिति पूर्व की तुलना मे सुधरी है | इसके अलावा सरकार ने 31 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों मे 181 महिला हेल्पलाइन केंद्रों को मंजूरी दी है और 206 वन स्टॉप केंद्र चल रहे है, जहाँ हिंसा की शिकार महिलाओं को तुरंत और आसानी के मदद मिल सकती है | मुश्किल मे फंसी महिलाओं के लिए इमरजेंसी मे मदद मुहैया कराने की खातिर सभी मोबाईल फोन मे पैनिक बटन की सुविधा भी जल्द उपलब्ध होगी | किन्तु अभी भी बहुत कुछ किया जाना शेष है | क्योंकि एक प्रगतिशील समाज का निर्माण महिलाओं की बराबर सहभागिता के बिना संभव नहीं है | यदि महिलाओं को कानून निर्मात्री के रूप मे स्वीकार किया गया तो वे महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर अपने विचार रख सकने मे सक्षम होंगी | जिसके लिए महिलाओं को राजनीति मे उनकी भूमिका को बढ़ाना होगा जिससे उनके वर्तमान स्थिति मे अत्यधिक परिवर्तन हो पायेगा | इसी दृष्टिकोण को ध्यान मे रखकर माननीय उपराष्ट्रपति ने सभी राजनीतिक दलों से महिला आरक्षण विधेयक को आम सहमति से पारित कराने का अनुरोध भी किया है | महिलाओं को राजनीतिक रूप से सशक्त बनाने के लिए, उन्हें नेतृत्वकर्ता के रूप मे स्थापित करने के लिए संसद द्वारा प्रयास किये जाने की आवश्यकता है |

महिलाओं को बिना किसी रोकटोक के अपने फैसले स्वयं लेने के लिए सशक्त बनाना और उन्हें पुरुषों के बराबर मानना राष्ट्र की सर्वागीण प्रगति के लिए अनिवार्य है | तथा उक्त सभी समस्याओं का समाधान महिलाओं की राजनीतिक सहभागिता को बढाने मे निहित है | एसा इसलिए क्योंकि महिलाओं के राजनीतिक सशक्तिकरण की पहल हमारे आने वाले कल, हमारे भविष्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यही पहल महिलाओं की बहुआयामी नि:शक्तता को संबोधित करने हेतु आधार का कार्य करेगी, महिलाओं को उनकी क्षमता से अवगत कराएगी जो वर्तमान समय की मांग बन चुकी है | इसके अतिरिक्त, हमें व्यक्तिगत स्तर पर भी प्रयास करना होगा जिससे महिलाए न केवल सामाजिक रूप से वरन आर्थिक, धार्मिक, सांस्कृतिक रूप से भी सशक्त हो सके, तभी सच्चे अर्थो मे राष्ट्र प्रगति के मार्ग पर अग्रसर हो सकेगा | डॉ. अम्बेडकर ने कहा भी था, “किसी समुदाय की प्रगति का मापन उस समुदाय की स्त्रियों की प्रगति के स्तर के आधार पर किया जा सकता है |”



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                               Ajeet Pasi
                         Civil Service Aspirant (UPSC)
                     





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                                                                                             धन्यवाद’..!

4 comments:
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  1. This comment has been removed by a blog administrator.

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  2. Most important for upsc aspirants.......thanks santosh ji

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  3. Bhai Bahut Achhe se Sari topic ko tuch kiya hai.

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